उपरोक्त शीर्षक चित्र श्री श्री राधा श्याम सुंदर , इस्कान मंदिर वृन्दावन, तिथि 15.04.2010 के दर्शन (vrindavan darshan से साभार ).

मंगलवार, 9 दिसंबर 2008

ये कैसा ....................


प्यार को पाने भटक रहे सब प्यार बिना सब है बेकार



ये कैसा गुलशन का माली सारा गुलशन दिया उजाड़
इस माली के आने से क्यूँ इस बगिया से गई बहार

कहाँ गए गुलशन के रहबर जो गुलशन पर मरते थे
फूल -२ पत्ते-२ पर करते अपनी जान निसार

कहाँ गए पंछी सारे जो चहक रहे थे गुलशन में
बेमौसम आया ज्यों पतझड़ तरुवर पड़ने लगे बीमार

सारा गुलशन  उजड़  गया बदल गया वीराने में
पत्ता -२ तरस गया पाने को माली का प्यार

कौन रखे जख्मों पर मरहम बर्बादी के आलम में
प्यार को पाने भटक रहे सब प्यार बिना सब है बेकार

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2 टिप्‍पणियां:

निरन्तर - महेंद्र मिश्रा ने कहा…

कहाँ गए गुलशन के रहबर जो गुलशन पर मरते थे
फूल -२ पत्ते-२ पर करते अपनी जान निसार
bahut badhiya rachana
(kripya Ward verification hatane ka kasht kare.)

श्यामल सुमन ने कहा…

समसामयिक और सुन्दर प्रस्तुति। बधाई। चलिए इसी तर्ज पर एक तुकबंदी मेरी तरफ से भी-

बर्षों तक जो सुमन को लूटा काँटों की तादाद बढ़ी।
ऐ माली तुम बगिया छोडो़ तभी देश होगा उद्धार।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com