उपरोक्त शीर्षक चित्र श्री श्री राधा श्याम सुंदर , इस्कान मंदिर वृन्दावन, तिथि 15.04.2010 के दर्शन (vrindavan darshan से साभार ).

रविवार, 28 दिसंबर 2008

गर तुम कहो तो...................

गर तुम कहो तो गाऊं, कोई गीत गुन-गुणाओं

गर तुम....................................................



सब गीत चुक गए हैं तुमको मना के हारा

सब बोल रुक गए हैं तुमको बुला के हारा

टूटे हुए इस दिल से सदियों का एक सपना

कह दो तो फिर सजाऊं , गर तुम....................



जन्मों का है ये नाता गर याद हो तुम्हें भी

उल्फत का कोई वादा गर याद हो तुम्हें भी

भूला हुआ वो नगमा जो खो गया कहीं पर

कह दो तो ढूंढ लाऊं , गर तुम.........................



आँखें तरस रही हैं एक बार चले आओ

छोटी सी जिंदगी है अब और न सताओ

दुनिया के सामने हैं सारी हकीक़तें अब

कब तक इन्हें छुपाऊं, गर तुम....................



है प्रीत का ये बंधन, मिलना तो है ज़रूरी

मिलना विराट में है मिटना तो है ज़रूरी

कई बार गीत गाकर तुमको बता चुका हूँ

कह दो तो फिर बताऊँ।, गर तुम ....................



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4 टिप्‍पणियां:

MANVINDER BHIMBER ने कहा…

सब गीत चुक गए हैं तुमको मना के हारा

सब बोल रुक गए हैं तुमको बुला के हारा

टूटे हुए इस दिल से सदियों का एक सपना

कह दो तो फिर सजाऊं , गर तुम....................
आप ने बहुत सुंदर शब्दों का चयन किया है

"अर्श" ने कहा…

बहोत खूब लिखा है आपने ढेरो बधाई .................


अर्श

नीरज गोस्वामी ने कहा…

बहुत दिलकश अंदाज़ है ....बहुत आसन शब्दों में दिल की बात कही है...वाह वा...
नीरज

Shanti ने कहा…

i liked this one very much because of its simplicity ...... and it reminded me of old hindi songs' lyrics .....