उपरोक्त शीर्षक चित्र श्री श्री राधा श्याम सुंदर , इस्कान मंदिर वृन्दावन, तिथि 15.04.2010 के दर्शन (vrindavan darshan से साभार ).

सोमवार, 12 जनवरी 2009

कान्हा हमें भी सुना दे..............

कान्हा हमें भी सुना दे एक बार बंसरी
कान्हा हमें भी सुना दे एक बार बन्सरी

राधा को सुनावे तू गोपी को सुनावे तू
भक्तों को सुनावे तू संतों को सुनावे तू
हम भी तो करे हैं तोसे प्यार बंसरी
कान्हा हमें................................................

नाम से पुकारे तेरी बंसरी में जादू है
जिसे वो पुकारे बड़े भाग वाला साधू है
हमें भी पुकारे एक बार बंसरी
कान्हा हमें................................................

नाचती है राधा तेरी बांसुरी की धुन पर
नाचती है गोपी तेरी बांसुरी को सुनकर
जिसे सुन नाचे संसार बंसरी
कान्हा हमें.............................................

सुनते ही रहें तेरी बंसरी की तान को
भूल जायें सारे जग के अभिमान को
हर जनम सुनें बार -बार बंसरी
कान्हा हमें............................................



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3 टिप्‍पणियां:

संगीता पुरी ने कहा…

सुनते ही रहें तेरी बंसरी की तान को
भूल जायें सारे जग के अभिमान
हर जनम सुनें बार -बार बंसरी
कान्हा हमें............................................
बहुत सुंदर।

"अर्श" ने कहा…

shak hai kahin aap compose bhi to nahi karte sath me apne kavitawon ko? bahot badhiya likha hai aapne..


arsh

विनय ने कहा…

सुन्दर, स्वच्छ और निर्मल कविता

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