उपरोक्त शीर्षक चित्र श्री श्री राधा श्याम सुंदर , इस्कान मंदिर वृन्दावन, तिथि 15.04.2010 के दर्शन (vrindavan darshan से साभार ).

शनिवार, 20 जून 2009

शायद व्याकुल ह्रदय मेरा , इन गीतों से ही जाए बहल

गुमनाम कवि गुमसुम रहकर गाता हूँ ग़म के गीत ग़ज़ल
शायद व्याकुल ह्रदय मेरा , इन गीतों से ही जाए बहल



तन्हाई के तम में से , मैं खोजूं नए तरानों को
यादों के जंगल में खो, मैं खोजूं गए ज़मानों को
अण्डों में बच्चे करते ज्यों, दिल में गीतों की हलचल
गुमनाम कवि..................................................

आसमान में टिकी हुई हैं मेरी नज़रें व्याकुल-सी
हवा ही शायद दे जाए संदेश, कोई हैं आकुल-सी
मेरे ख्यालों के दर पर है, दस्तक सी उनकी पलपल
गुमनाम कवि..............................................

कुछ जुगनू से चमक रहे हैं , गीत मेरे अंधियारे में
झट से जाकर पकड़ लूँ उनको, ललक ह्रदय गलियारे में
दौडाता ही जाता है ज्यूँ , मुझे कोई बालक चंचल।
गुमनाम कवि................................................

20 टिप्‍पणियां:

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

तन्हाई के तम में से , मैं खोजूं नए तरानों को
यादों के जंगल में खो, मैं खोजूं गए ज़मानों को

बहुत स्वप्न जी बधाई .मनभावन रचना .

Dev ने कहा…

Sir Bahut sundar aur gahari kavita..
Regards..
DevPalmistry

vandana ने कहा…

bahut hi pyara geet.

linda ने कहा…

Really nice poetry.

Udan Tashtari ने कहा…

bahut sunder.

Udan Tashtari ने कहा…

बेहतरीन रचना.

M VERMA ने कहा…

कुछ जुगनू से चमक रहे हैं , गीत मेरे अंधियारे में
bahut khoob
sunder abhivyakti

ओम आर्य ने कहा…

अच्छा गीत है,पर ये गुमनाम कौन है. आप तो नहीं हैं?

ALOK PURANIK ने कहा…

भई बढ़िया कहा है, दिल बिलकुल बहलेगा जी। प्रेम और भक्ति पर आपकी रचनाएं बहुत ही बढ़िया आ रही हैं। बंदा प्रेमी और भक्त हो जाये, तो फिर क्या ही कहने। दिल बहलेगा और औरों को भी राह दिखायेगा।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

तन्हाई के तम में से , मैं खोजूं नए तरानों को
यादों के जंगल में खो, मैं खोजूं गए ज़मानों को

स्वपन जी............ लाजवाब गीत लिखा है........... अक्सर मन भटक जाता है और जब तन्हाई सताती है तो यादों के जंगल से खोजता है अपने आप को.......... सुन्दर रचना

अल्पना वर्मा ने कहा…

गुमनाम कवि--गीत अच्छा बना है.

अँधेरे में प्रकाश का इंतज़ार करता कवि किसी के इंतज़ार में है ..

Nirmla Kapila ने कहा…

हाँ जब व्याकुल हो मन तो ऐसे ही बह जाता है मन का झ्रना और कर जाता है सृ्जन ऐसे गीतों का बहुत ही सुन्दर गीत है बधाई

Mumukshh Ki Rachanain ने कहा…

कुछ जुगनू से चमक रहे हैं , गीत मेरे अंधियारे में

न भाई न, आपके गीत तो सूरज -चाँद सरीखे दमक रहे हैं............

बधाई.

चन्द्र मोहन गुप्त

ARVI'nd ने कहा…

ek achhi gazal sach me dil bahal gaya

दर्पण साह "दर्शन" ने कहा…

तन्हाई के तम में से , मैं खोजूं नए तरानों को
यादों के जंगल में खो, मैं खोजूं गए ज़मानों को
अण्डों में बच्चे करते ज्यों, दिल में गीतों की हलचल
गुमनाम कवि..................................................

FLAWLESS !!

mark rai ने कहा…

कुछ जुगनू से चमक रहे हैं , गीत मेरे अंधियारे में......very nice...

MUFLIS ने कहा…

हवा ही शायद दे जाए संदेश, कोई हैं आकुल-सी
मेरे ख्यालों के दर पर है, दस्तक सी उनकी पलपल
गुमनाम कवि.......

मन के भटकाव का सटीक चित्रण करती हुई
बहुत अछि रचना ,,,,
बार-बार पढना भी अच्छा लगता है
बधाई

---मुफलिस---

Pyaasa Sajal ने कहा…

aapke geeto ka mazaa liye jaa raha hoo bas...aap jaaree raho,ek pyaara ehsaas hai aapko padhte jaana

ज्योति सिंह ने कहा…

आसमान में टिकी हुई हैं मेरी नज़रें व्याकुल-सी
हवा ही शायद दे जाए संदेश, कोई हैं आकुल-सी
मेरे ख्यालों के दर पर है, दस्तक सी उनकी पलपल
bahut hi shandar .manbhavan rachana.

Babli ने कहा…

आपकी हर एक रचना एक से बढकर एक है! बेहतरीन रचना के लिए बधाई!