आन बसों मोरे श्याम, हमारे नयनन में

मेरी नज़र में तू है कन्हाई,और नहीं कुछ देत दिखाई
इन नयनों में बस जाए तू,हो जीवन की सफल कमाई

आन बसों मोरे श्याम,हमारे नयनन में
आय करो विश्राम, हमारे नयनन में

इन नयनन में ,धेनु चराओ
इन नयनन में,वंशी बजाओ
इन नयनन में ,माखन चुराओ
गोकुल और नन्द,गाँव हमारे नयनन में

आन बसों मोरे श्याम, हमारे नयनन में
आय करो विश्राम ,हमारे नयनन में......................................................


इन नयनन में ,कंस को  मारो
इन नयनन में, कुब्जा तारो
इक गिर्राज, उठाओ  भारो
गहो सुदामा पाँव, हमारे नयनन में

आन बसों मोरे श्याम, हमारे नयनन में
आय करो विश्राम ,हमारे नयनन में......................................................


इन नयनन में,रास रचाओ
प्रेम -प्रीत की, प्यास जगाओ
और राधिका को, संग लाओ
गीता की दो छाँव,  हमारे नयनन में

आन बसों मोरे श्याम हमारे नयनन में
आय करो विश्राम, हमारे नयनन में......................................................

16 टिप्पणियाँ:

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बहुत सुन्दर बस यादो में तुम बसे रहना . बधाई अच्छी रचना .

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

कन्हैया जी के इस भक्ति-गीत के लिए आपको बधाई!

kshama ने कहा…

Aapne 'maai ri...'ye geet yaad dila diya...waise to us geet me ek dard simta hua hai...yahan ummeed hai..

ओम आर्य ने कहा…

hare krishana ............ utakrith rachana....

M VERMA ने कहा…

समर्पण की खूबसूरत रचना

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

वाह,नयन प्रेम और कान्हा बेहतरीन अभिव्यक्ति..सुंदर कविता ..धन्यवाद

संगीता पुरी ने कहा…

सुंदर और पवित्र भावों से युक्‍त इतनी सुंदर रचना के लिए बधाई !!

शरद कोकास ने कहा…

विशुद्ध प्रेम की कविता है यह ।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सुन्दर गीत है प्रभु चरणों में ............ बहुत लाजवाब लिखा है .......

वन्दना ने कहा…

krishna prem mein pagi rachna............waah,adbhut ...........prem ki parakashtha hai.........aah!kanha aao ek baar aur aise bas jao ki har nazara bas tera hi ho.

अल्पना वर्मा ने कहा…

कृष्ण भक्ति के इतने मधुर गीत ब्लॉगजगत में अन्यथा कहीं भी अभी तक तो नज़र नहीं आये.
कान्हा के प्रति आप का समर्पण लाजवाब है.
यह गीत भी बेहद सुन्दर है

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

वाह.... बेहतरीन भक्ति रचना..... साधुवाद...

संजीव गौतम ने कहा…

आनन्द्दायक भजन है. हमारे आगरा में आपकी ही तरह कवि मित्र दादा गोपाली जी हैं बहुत अच्छी भक्ति की रचनाएं लिखते हैं. आपको पढते ही मन उनके पास जा पहुंचता है.

ज्योति सिंह ने कहा…

ishwar ki saari lila nayno me sama gayi .bahut sundar .

Harkirat Haqeer ने कहा…

Swapn ji ,

Sach kahun ....aaj is bhakti geet mein ek alag swaad mila....aapne apni bhakti bhavna ko ek naye rup mein pesh kiya hai jo aakarshit karti hai ......bohot sunder ....!!

vandana ने कहा…

bahut sunder geet hai ..bhakti prem se bharpoor ..badhai

 

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