लीजिये एक और शब्द चित्र "श्याम श्याम भजो" कैसेट से.
मेरी राधा के संग मंगनी , कराइ दे मेरी मैया-२
मेरी राधा के संग मंगनी , कराइ दे मेरी मैया-२
मेरी राधा के संग मंगनी , कराइ दे मेरी मैया-२
कराइ दे मेरी मैया, कराइ दे मेरी मैया
मेरी राधा के संग मंगनी कराइ दे मेरी मैया
मेरी...............................................
रो रो यशोदा से बोले कन्हैया ,रो रो यशोदा से बोले कन्हैया
मेरी राधा के संग मंगनी कराइ दे मेरी मैया
मैं राधा के साथ रहूँगा
उससे मन की बात कहूँगा
मुझको भी दूल्हा बनाई दे री मैया
मेरी राधा.......................................
राधा बिन अब चैन नहीं है
नींद मुझे दिन रैन नहीं है
वादा, तू , कल का निभाई दे री मैया
मेरी राधा......................................
जन्म जन्म के हम हैं साथी
साथी जैसे दीपक बाती
अब के भी मेल कराई दे री मैया
मेरी राधा....................................
राधा मुझमें , मैं राधा में
राधा के बिन हूँ आधा मैं
दुनिया को सारी बताई दे री मैया
मेरी राधा...............................




10 टिप्पणियाँ:
वाह स्वपन जी बहुत सुन्दर कविता है आपको इस मंगनी पर बधाई
लोकराग में डूब कर भक्ति की तान छेडना भी परमानन्द देता है. अब तो इस तरह की रचनात्मकता गायब ही हो रही है. भक्ति से आसक्ति लोगों की शक्ति बढाती है. आप एक बड़ा काम कर रहे है.
भक्तिरस में भीग गये!
निवेदन का रोचक अंदाज
sundar bhav.
राधा कृष्ण के प्रेम को जीवित करती सुंदर रचना है .......... जे श्री कृष्णा .......
सुंदर भजन
कविता पसंद आयी.
... मनभावन गीत !!!
girish ji ne bahut sahi baat kahi ,bhakti ras me itni gahrai se likhte aapko hi dekha hai,krishna kripa hai aap par ,ati sundar
एक टिप्पणी भेजें