लीजिये एक और रचना "श्याम -श्याम भजो" कैसेट से.
मो से रूठ गए री घनश्याम , बता दो उन्हें कैसे मनाऊं-२
मो से रूठ गए री घनश्याम , बता दो उन्हें कैसे मनाऊं-२
मो से रूठ गए री घनश्याम , बता दो उन्हें कैसे मनाऊं-२
मो से रूठ गए री घनश्याम , बता दो उन्हें कैसे मनाऊं-२
मोहे सूझे ना कुछ हाय राम, बता दो उन्हें कैसे मनाऊं -2
बता दो उन्हें कैसे मनाऊं....................
ना उनकी वंशी मोहे पुकारे
ना उनके नैना मोहे निहारें
श्याम मिलन की आशा लेकर छोड़ धाई रे सब काम, बतादो.................
मो से रूठ गए री घनश्याम , बता दो उन्हें कैसे मनाऊं
रास में मोहे साथ ना लेवें
हाथ में मेरे हाथ ना देवें
दिल मेरा बैठा जाता है, क्या होगा रे अंजाम, बता दो...................
मो से रूठ गए री घनश्याम , बता दो उन्हें कैसे मनाऊं
मुझसे कुछ भी बात करें ना
नयनों से भी घात करें ना
सूना सूना जग लगता है,पीर, ना जाने रे घनश्याम, बता दो..............
मो से रूठ गए री घनश्याम , बता दो उन्हें कैसे मनाऊं
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13 टिप्पणियाँ:
सुन्दर रचना...प्रस्तुत करने का आभार. सुन पाते तो आनन्द आ जाता.
श्याम-भक्ति श्रृंखला में एक अद्भुत, अभूतपूर्व रचना. वास्तव में आपने डूब के लिखा हैं. श्याम से सारी शिकायतें जायज़ हैं और इतनी स्वाभाविक स्थिति में हैं कि दिल से वाह निकल जाती है.
ok, thanks
बहुत ही सुन्दर गीत.
waah ..........dard poori tarah ubhar kar aa raha hai.........bahut hi badhiya.
bahut achchi rachna yogesh ji
man shant sa ho gaya
श्याम रंग में रंगा यह विरह गीत पसंद आया.
सुन पाते तो..क्या बात थी!
"श्याम -श्याम भजो" कैसेट की आपकी सभी भक्ति रचना बहुत सुन्दर हैं!
VIRAH KI AAG MEIN TAPA .... SHYAAM KI MOHINI MEIN RACHA .... LAJAWAAB BHAJAN ..... MAZAA AA GAYA ...
सुंदर.
स्वप्न जी
सुन्दर रचना आभार
Behad sundar geyta liye hue hai ye rachna!
कैसे लिख लेते हैं इतने प्यारे भाव ......अद्भुत और अभूतपूर्व .......!!
हाँ ये कविता इमरोज़ की लिखी है मेरी नहीं .....!!
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