चाँद पर बादल, घनेरा हो गया
कौन था क्यूँकर, वो मेरा हो गया
आरजूओं का, सवेरा हो गया
धडकनों में आ गया, तूफ़ान-सा
दिल में ये किसका, बसेरा हो गया
हाल मेरा देख, सब पूछें हैं क्यूँ ?
बात क्या है? कौन तेरा हो गया?
दर्द का अहसास भी होने लगा
राम जाने, क्या बखेड़ा हो गया
बस वही जुगनू-सा बन चमका किया
और रौशन, घुप अँधेरा हो गया
आँख के रस्ते उतर कर, दिल में वो
था शरीफों में , लुटेरा हो गया
उसके वश में हो, मुझे लगने लगा
प्यार का, जीवन में डेरा हो गया
जब से वो मुझसे मिला, बिछुड़ा,तभी
याद मेरी, एक चेहरा हो गया
दीद की सब, कोशिशें बेकार हैं
चाँद पर बादल, घनेरा हो गया
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रचना की तिथि २८.०१.२०१०




11 टिप्पणियाँ:
दीद की सब कोशिशें बेकार हैं
चाँद पर बादल घनेरा हो गया ...
वाह वाह ...
भावनाओ से परिपूर्ण, बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति .......बधाई स्वीकार करे !!
http://kavyamanjusha.blogspot.com/
रचना तो बहुत सुन्दर है
मगर दिल पर कावू रखना जी!
कुँवर सुखलाल ने एक भजन लिखा था-
"तुझे दुनिया काबू में कर लेगी नादां,
जो काबू मे तेरे, तेरा दिल नही है!"
सुंदर , सरल प्रस्तुति । शानदार रचना
waah waah ............aaj to kamaal kar diya har pankti mein.........lajawaab rachna.
हाल मेरा देख कर पूछें---- और दीद की सब कोशिश बेकार-----
वाह योगेश जी क्या खूब शेर हैं । लाजवाब रचना के लिये बधाई
सुभानल्लाह योगेश जी..सुभानल्लाह..क्या शेर निकाले हैं।
"हाल मेरा देख, सब पूछें हैं क्यूँ ?
बात क्या है? कौन तेरा हो गया?"
hats off sir ji
धडकनों में आ गया, तूफ़ान-सा
दिल में ये किसका, बसेरा हो गया ..
वाह ..... बहुत ही कमाल के शेर हैं ......... लाजवाब लिखा है ........
मुझको यह रचना रुची
bahut hi sundar.Badhai!!
bahut hi bhalee,,,,,
apni-si lagne waali gazal,,,
w a a h !!
kabhi kabhi rumaani ehsaas
dil ko chherhte haiN
to jaane kyu achhaa lagta hai
aur yahi aapki is
pur-kashish gazal keh rahi hai .
badhaaee .
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