उपरोक्त शीर्षक चित्र श्री श्री राधा श्याम सुंदर , इस्कान मंदिर वृन्दावन, तिथि 15.04.2010 के दर्शन (vrindavan darshan से साभार ).

सोमवार, 1 फ़रवरी 2010

खुल गई है फिर पुरानी डायरी

खुल गई है फिर पुरानी डायरी



खुल गई है फिर, पुरानी डायरी
आ गई फिर याद, भूली शायरी

हो गए पीले सभी, पन्ने मगर
गंध अब तक भी, सुहानी आए री

फूल सूखे कह रहे, रोते हुए
याद ना दिल से पुरानी, जाए री

क्या कहें मुश्किल, हमें उसके सिवा
आज तक दूजा ,कोई ना भाए री

आज भी सुनकर, कहीं एक नाम वो
मन तुरत दिल से ,निकल कर धाए री

जो बनाया था कभी, उसके लिए
दिल वही भूला, तराना, गाए  री

आँख से जैसे, समंदर बह चला
तन तड़प कर, कह रहा है"हाय"री

"स्वप्न" शायद वो भी, तडपेगा यूँही
वो कहीं भी जाए, बेशक जाए री

***********************

10 टिप्‍पणियां:

kshama ने कहा…

Harek pankti apna wajood liye hue hai! Mere paas alfaaz nahi!

ज्योति सिंह ने कहा…

kshma ji ne sahi kaha ,sabhi lines jaandaar hai ,pahli taarikh me purani daayri ka khulna behad dilchasp raha

दिगम्बर नासवा ने कहा…

आँख से जैसे, समंदर बह चला
तन तड़प कर, कह रहा है"हाय"री
"स्वप्न" शायद वो भी, तडपेगा यूँही
वो कहीं भी जाए, बेशक जाए री

बहुत खूबसूरत एहसास बंद हैं पुरानी डायरी में .......... मज़ा आ गया स्वपन जी ............

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

पुरानी डायरी की शायरी सदाबहार है जी!

kumar zahid ने कहा…

Dairy, Shayri ...aur hindi ki Hay ri. Achchha sangam.
aapki juban mein apnapan hai.

M VERMA ने कहा…

खुल गई है फिर, पुरानी डायरीआ गई फिर याद, भूली शायरी
और यह भूली शायरी बहुत शानदार है

निर्मला कपिला ने कहा…

ये पुरानी डायरी तो यादों का खजाना है बहुत अच्छी रचना है अब आप पुस्तक कब प्रकाशित करवा रहे हैं? इन्तज़ार है। शुभकामनायें

संजीव गौतम ने कहा…

आँख से जैसे, समंदर बह चला
तन तड़प कर, कह रहा है"हाय"री
apni sahazta ke karan behad prabhavshali panktiyaan hain.
maaf kariyega aanaa jana kam ho pa rahaa hoon. beech beech men padha to lrtaa hoon par tippani nahin kar paata.

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

.... बेहतरीन !!!!

psingh ने कहा…

स्वप्न जी
बहुत सुन्दर रचना कमाल के
शब्दों का चयन किया है पुरानी
डायरी नयापन लिए हुए |
आभार...........................