प्यार किसी से, ना कर, ज्यादा, दुःख होगा
प्यार किसी से, ना कर, ज्यादा, दुःख होगा
बदल ले अपना अभी इरादा दुःख होगा
दुःख होगा दुःख होगा दुःख होगा दुःख होगा
प्यार किसी से, ना कर .......................
वो समझेगा, कोई स्वारथ है तेरा
लिपट रहा क्यूँ, कोई मकसद है तेरा
तोड़ेगा तेरा हर वादा, दुःख होगा
दुःख होगा दुःख होगा, दुःख होगा दुःख होगा
प्यार किसी से,ना कर .......................
प्यार असल में, करने वाले होते मूरख
प्यार की इस दुनिया वालों को नहीं ज़रुरत
वचन कहूँ मैं सीधा सादा, दुःख होगा
दुःख होगा दुःख होगा दुःख होगा दुःख होगा
प्यार किसी से ना कर .......................
प्यार पे पड़ता भारी, पैसा, सब जानें
पैसा हो तो कौन है कैसा, रब जाने
पैसा बनता सारी बाधा, दुःख होगा
दुःख होगा दुःख होगा दुःख होगा दुःख होगा
प्यार किसी से ना कर .......................
इस दुनिया में समझे सच्चा प्यार कोई
करे प्यार से कभी नहीं इनकार कोई
युगों युगों में आता है इक बार कोई
मुश्किल से मिलता है ऐसा यार कोई
संशय में अब क्यूँ है आधा , दुःख होगा
दुःख होगा दुःख होगा दुःख होगा दुःख होगा
प्यार किसी से, ना कर .......................
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12 टिप्पणियाँ:
क्या कविता लिखी है आपने........ दिल खुश हो गया.... एक एक शब्द में सच्चाई है.... लगता है बहुत डूब कर सच्चाई को महसूस करते हुए लिखा है आपने..... इस कविता को मैं कंठस्थ करने जा रहा हूँ.... बहुत शानदार कविता है.... क्या कहूँ? कैसे तारीफ़ करूँ? समझ नहीं आ रहा... बस यह कहूँगा कि आपकी कविता दिल में उतर गई...
सुन्दर गीत!
प्यार किसी से ना कर ज्यादा, दुख होगा .. बिल्कुल सही लिखा है आपने .. पर यह क्या संभव है !!
bahut achchhi kavita.
ek sachchayi ko sundar lafzon mein bandha hai........bahut hi sundar prastuti.
सच है .......... पैसे का बोलबाला जब से हव है ...... वो सब पर भारी है ...... प्यार तो बस छिप कर रह गया है क़िताबो में ..........
Pyar sach me tadpa deta hai..
प्यार पे पड़ता भारी, पैसा, सब जानेंपैसा हो तो कौन है कैसा, रब जानेपैसा बनता सारी बाधा, दुःख होगा दुःख होगा दुःख होगा दुःख होगा दुःख होगाप्यार किसी से ना कर ...................
bahut behtar geet. badhai!!
ज़िन्दगी की इतनी तल्ख सच्चाई, इतने आसान लफ्जों में बयान करना कठिन था लेकिन आप यह पुल पर कर गए.
इसके बावजूद एक प्रश्न उठता है- क्या ऐसा सम्भव है?
jahan umeed wahi dar shayad yahi hai pyaar ka ghar ,dil ke ahsaas hote nahi bekhbar ,na chah kar bhi aadmi pahunch jaata iske dar ,dil par jod nahi par sandesh aapka hai sahi ,pyaar kisi se na kar .dukh se door rahna behtar .umda.
बहुत अच्छा गीत है एक एक शब्द सीख देता हुया। बधाई आपको। असल मे मैने कई दिन से याहू मेल नही देखा था इस लिये आपकी रचनायें न देख सकी । धन्यवाद्
रंग बिरंगे त्यौहार होली की रंगारंग शुभकामनाए
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