कुछ दोहे

धन की खातिर ना किसी, मिले मनुज का शाप

नेता गर तू बन गया , कर्म ना अपना भूल
सच्ची सेवा कर सदा यही धर्म का मूल

व्यापारी है तू अगर , नानक से कुछ सीख
सच्चा सौदा कर सदा, मानव जैसा दीख

बना चिकित्सक तो सदा, जान बचा निष्पाप 
धन की खातिर ना किसी, मिले मनुज का शाप

अफसर बनकर तू सदा ध्यान राखियो भाय
रब की लाठी जब चले, होत न कोई सहाय

सेवा का है  कर्म तो , कर्म प्रभु का मान
फल की चिंता त्याग दे  , छोड़ सकल अभिमान
लहरों सम होता यहाँ , मिलना और वियोग
कोई "बाई चांस" तो ,  कहे  कोई संयोग

मीत मिले सच्चा अगर, रब की नेमत जान
ऐसे सच्चे मीत पर, सौ जीवन कुर्बान

दूजे पर ऊँगली उठा, खुद को समझे नेक
शेष चार तेरी तरफ, ज़रा गौर से देख

निंदा चुगली में लगा, क्या पायेगा मोल
वक्त फिसलता जा रहा, नाम हरी का बोल

ये मानव की देह फिर, पाए या ना पाय 
चौरासी से त्राण  का , करले तनिक  उपाय.
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13 टिप्पणियाँ:

manu ने कहा…

स्वपन जी..
दोहे पढ़े..
लय रवानी में मजा आ गया....
साथ साथ शिक्षाप्रद भी...
खूब..

M VERMA ने कहा…

सुन्दर और सार्थक दोहे. समसामयिक भी.

Udan Tashtari ने कहा…

सभी दोहे एक से एक उम्दा और सीख देते हो.सकारात्मक सृजन!! बधाई!

वन्दना ने कहा…

aaj to kamaal hi kar diya........har doha ek sikh deta hua .........bahut hi shikshaprad dohe.........lajwaab.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

हर किसी को राह दिखाते दोहे ..... कमाल का लिखा है स्वपन जी ........

मिलिंद / Milind ने कहा…

स्वप्नजी,
दोहे पसंद आये.
निंदा चुगली में लगा, क्या पायेगा मोल
वक्त फिसलता जा रहा, नाम हरी का बोल
ये मानव की देह फिर, पाए या ना पाए
चौरासी से त्राण का , करले तनिक उपाय

वाह.

नीरज गोस्वामी ने कहा…

योगेश जी एक एक दोहा ज्ञान से भरा हुआ है और हमें अच्छा और सच्चा जीवन जीने की प्रेरणा देता है...इस विलक्षण पोस्ट के लिए आपका कोटिश आभार...
नीरज

रंजना ने कहा…

परम हितकारी दोहे...पर काश लोग इसे ह्रदय में धारण कर व्यवहार में उतार सकते....लेकिन ठीक है,स्मरण करते रहना हमारा कर्तब्य है,शायद कभी किसी के मन में बैठ ही जाये बात...

सुन्दर सन्देश देती बहुत सुन्दर रचना...

रचना दीक्षित ने कहा…

बहुत अच्छा लगा पढ़ कर. बहुत सार्थक बातें हैं.पर अफ़सोस तो इस बात का है की इन सब बातों का आज के जमाने में मूल्य कम आँका जाता है .

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

शानदार दोहे. मज़ा आ गया.

निर्मला कपिला ने कहा…

sundar aur saarthak dohe | badhaaIba

ज्योति सिंह ने कहा…

saare dohe shaandar lage .
बना चिकित्सक तो सदा, जान बचा निष्पाप धन की खातिर ना किसी, मिले मनुज का शाप
bahut sahi

तिलक राज कपूर ने कहा…

हिन्‍दी काव्‍य में सटीक अभिव्‍यक्ति का सर्वोत्‍तम माध्‍यम शायद दोहा ही है, और इस माध्‍यम का यह कुशल उपयोग प्रशंसनीय है।

 

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