झरने लगे नयनों से आँसू , अब तो आन मिलो मेरे श्याम
(एक भजन)
झरने लगे नयनों से आँसू , अब तो आन मिलो मेरे श्याम
झड़ी लग गई है अविराम , अब तो आन मिलो मेरे श्याम
कहाँ -कहाँ खोजा प्रभु तुमको, मंदिर मस्जिद तीरथ छाने
भटक भटक कर तुम्हें खोजते, बीत गए कितने युग जाने
हार गया प्रभु माला "कर" ले, जपते जपते तेरा नाम
झरने लगे नयनों से आँसू , अब तो आन मिलो मेरे श्याम
झड़ी लग गई है अविराम , अब तो आन मिलो मेरे श्याम
छूट गए सब संगी साथी , खेल, तमाशे, नाटक छूटे
अपना कोई नहीं प्रभु जग में, जग के सारे नाते झूठे
आज तोड़ दो आकर कान्हा , माया के ये बंध तमाम
झरने लगे नयनों से आँसू , अब तो आन मिलो मेरे श्याम
झड़ी लग गई है अविराम , अब तो आन मिलो मेरे श्याम
एक तुम्हारी प्यास ,यही विश्वास, तुम्हें पाना है कान्हा
तड़प रही है प्यासी मछली, सागर में जाना है कान्हा
नहीं चाहती और तड़पना, रूह चाहती अब विश्राम
झरने लगे नयनों से आँसू , अब तो आन मिलो मेरे श्याम
झड़ी लग गई है अविराम , अब तो आन मिलो मेरे श्याम
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21 टिप्पणियाँ:
nice
भक्ति रस और आध्यातम के समागम से सजी बहुत सुन्दर रचना के लिये आपको ह्र्दय से आभार!
http://kavyamanjusha.blogspot.com/
बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना है। बधाई।
झरने लगे नयनों से आँसू , अब तो आन मिलो मेरे श्याम
(एक भजन)
झरने लगे नयनों से आँसू , अब तो आन मिलो मेरे श्यामझड़ी लग गई है अविराम , अब तो आन मिलो मेरे श्याम
कहाँ -कहाँ खोजा प्रभु तुमको, मंदिर मस्जिद तीरथ छानेभटक भटक कर तुम्हें खोजते, बीत गए कितने युग जानेहार गया प्रभु माला "कर" ले, जपते जपते तेरा नाम
kin shabdon mein tarif karoon.........man moh liya ........is bhajan ko to koi apne swar de de to ismein char chaand lag jayein.........ati uttam.
छूट गए सब संगी साथी , खेल, तमाशे, नाटक छूटे अपना कोई नहीं प्रभु जग में, जग के सारे नाते झूठे
सच है स्वपन जी .... पर उसकी याद सब कुछ खोने के बाद आती है ...
दिल को छू रही हैं ये लाइने ....
भक्ति रस में डूबी हुई भजन
बहुत भावपूर्ण और भक्ति रस में डूबा गीत...मन आनंदित हो गया
छूट गए सब संगी साथी , खेल, तमाशे, नाटक छूटे अपना कोई नहीं प्रभु जग में, जग के सारे नाते झूठे
kitni sachchi baate hai ,man ko bha gayi ,bahut sundar
सुन्दर भावपूर्ण रचना है। बधाई!!
छूट गए सब संगी साथी , खेल, तमाशे, नाटक छूटे
अपना कोई नहीं प्रभु जग में, जग के सारे नाते झूठे
आज तोड़ दो आकर कान्हा , माया के ये बंध तमाम
-सत्यवचन, स्वप्नजी! भजन पसंद आया.
स्वप्न जी
बहुत सुन्दर भजन लिखा आपने
प्रेम रस में डूबा
अनूठे प्रेम और भक्ति भाव से
परिपूर्ण
आभार ...........
बहुत सुन्दर गीत. बधाई.
भजन पढ़ कर आनँद आया , आपकी बाकी रचनाएं भी मौलिक और रोचक लगीं |आपकी प्रोफाइल भी आपके बारे में बहुत कुछ बता रही है !
सुंदर भजन.
.... सुन्दर व प्रभावशाली अभिव्यक्ति !!
Dilke tahkhane se nikle alfaaz!
bhakti me shakti badee, karte rahe yogesh.
ik din aisaa aayega, aayenge devesh..
badhai, is yug me bhi bhakti-maarg par chalane ke liye....
प्रभावी अभिव्यक्ति..उम्दा गीत...बधाई.
बेहद खूबसूरत भावाभिव्यक्ति...बेहतरीन रचना..बधाई.
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शब्द सृजन की ओर पर पढ़ें- "लौट रही है ईस्ट इण्डिया कंपनी".
छूट गए सब संगी साथी ,
खेल, तमाशे, नाटक छूटे
अपना कोई नहीं प्रभु जग में,
जग के सारे नाते झूठे
यही तो सर्वविदित तथ्य है, पर समझ में लोगों के देर से ही क्यों आता है.
कबीर दास तो बहुत पहले ही कह गए हैं....
यह जीवन कागज़ की पुडिया , बूंद पड़े घुल जाना है
कृष्ण गीता में भी अर्जुन के बहाने सारे संसार को सन्देश दे गए हैं की इस सरे संसार में कोई किसी का रिश्तेदार नहीं,..........
भजन बहुत ही सुन्दर और सार्थक ही नहीं बल्कि प्रभावशाली भी है.
होली पर आपको हार्दिक बधाई.
चन्द्र मोहन गुप्त
bahut sunder hai....
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