कभी बनाया साकी मुझको , कभी पिलाया जाम

कभी नचाया बना के राधा , कभी बना के श्याम
कभी बनाया साकी मुझको , कभी पिलाया जाम
बड़ा अनूठा रास रचाया , मनमोहन घनश्याम
तूने मनमोहन घनश्याम

कलियुग में भी तेरी मुरलिया बाज रही चहुँ ओर
जिसे पुकारे वो ही जाने श्याम छिपे किस ठौर
और राधिका दौड़ रही है छोड़ के सारे काम

बड़ा अनूठा रास रचाया , मनमोहन घनश्याम
तूने मनमोहन घनश्याम

गीत भी है संगीत भी है, सबके मन में प्रीत भी है
राधा सी मतवाली भी है, मोहन सा मनमीत भी है
रास-नृत्य-रस भिगो रहा है मन-वृन्दावन-धाम

बड़ा अनूठा रास रचाया , मनमोहन घनश्याम
तूने मनमोहन घनश्याम

सत्य हो गए स्वप्न वो सारे , जो देखे थे गोपी ने
मन मंदिर में श्याम पधारे, प्रेम-सुधा-रस को पीने
बड़े भाग्य रे आज "स्वप्न" के श्याम मिले बे-दाम

बड़ा अनूठा रास रचाया , मनमोहन घनश्याम
तूने मनमोहन घनश्याम

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10 टिप्पणियाँ:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बढ़िया प्रस्तुति ..

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत ही सुंदर !!

निर्मला कपिला ने कहा…

बहुत सुन्दर गीत है
बधाई।

अल्पना वर्मा ने कहा…

प्रभु की लीला ही ऐसी है.
कब किस रूप में सामने आ जाएँ,कौन जाने.
-कलयुग में भी बांसुरी की धुन राधा सुनती है..अद्भुत!
बहुत सुन्दर भक्ति भाव पूर्ण गीत.

"अर्श" ने कहा…

एक बहुत ही अछि रचना के लिए बहुत बहुत बधाई आपको

आपका
arsh

मिलिंद / Milind ने कहा…

बहुत सुंदर !

ज्योति सिंह ने कहा…

सत्य हो गए स्वप्न वो सारे , जो देखे थे गोपी नेमन मंदिर में श्याम पधारे, प्रेम-सुधा-रस को पीनेबड़े भाग्य रे आज "स्वप्न" के श्याम मिले बे-दाम
बड़ा अनूठा रास रचाया , मनमोहन घनश्याम
तूने मनमोहन घनश्याम
bahut hi madhur ,prabhu leela adbhut hi hai

निर्झर'नीर ने कहा…

बड़े भाग्य रे आज "स्वप्न" के श्याम मिले बे-दाम
bahut khoob swapn ji

ek accha bhajan ..bandhaii swikaren ..........radhe radhe

rahul pandit ने कहा…

uttam rachna...

INDIAN the friend of nation ने कहा…

good sir .thanks

 

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