उपरोक्त शीर्षक चित्र श्री श्री राधा श्याम सुंदर , इस्कान मंदिर वृन्दावन, तिथि 15.04.2010 के दर्शन (vrindavan darshan से साभार ).

शनिवार, 20 जून 2009

शायद व्याकुल ह्रदय मेरा , इन गीतों से ही जाए बहल

गुमनाम कवि गुमसुम रहकर गाता हूँ ग़म के गीत ग़ज़ल
शायद व्याकुल ह्रदय मेरा , इन गीतों से ही जाए बहल



तन्हाई के तम में से , मैं खोजूं नए तरानों को
यादों के जंगल में खो, मैं खोजूं गए ज़मानों को
अण्डों में बच्चे करते ज्यों, दिल में गीतों की हलचल
गुमनाम कवि..................................................

आसमान में टिकी हुई हैं मेरी नज़रें व्याकुल-सी
हवा ही शायद दे जाए संदेश, कोई हैं आकुल-सी
मेरे ख्यालों के दर पर है, दस्तक सी उनकी पलपल
गुमनाम कवि..............................................

कुछ जुगनू से चमक रहे हैं , गीत मेरे अंधियारे में
झट से जाकर पकड़ लूँ उनको, ललक ह्रदय गलियारे में
दौडाता ही जाता है ज्यूँ , मुझे कोई बालक चंचल।
गुमनाम कवि................................................

रविवार, 14 जून 2009

मेरे श्याम..........

बहुत हो चुकी आँख मिचौनी , दूरी आज मिटाओ श्याम
मुझसे आकर मिलो यहाँ या, मुझको पास बुलाओ श्याम
मेरे श्याम, मेरे श्याम,मेरे श्याम,मेरे श्याम,मेरे श्याम

दूर -दूर रहते रहते तो दूरी बढती जाती है
तुम तो आते नहीं तुम्हारी,यादें बहुत सताती है
दिव्य नेत्र दे दो आँखों से पर्दा ज़रा हटाओ श्याम
मेरे श्याम.........................................................

दूर बज रही वंशी की धुन मुझको पास बुलाती है
कभी सुनाई देती मुझको और कभी खो जाती है
आओ मेरे निकट बैठ कर वंशी आज बजाओ श्याम
मेरे श्याम......................................................

भव सागर में भटक-२ कर देखा सब कुछ झूठा है
मोहन तेरी शरण में सुख है, सुख का सपना टूटा है
कृपा करो मुझपर भी अब तो अपनी शरण लगाओ श्याम
मेरे श्याम.....................................................

मेरी तो अभिलाषा मोहन अब तुम में मिल जाना है
थका -थका नदिया का जल हूँ, सागर आज समाना है
सागर में मिलने दो मुझको , "मैं" को आज मिटाओ श्याम
मेरे श्याम...................................................