उपरोक्त शीर्षक चित्र श्री श्री राधा श्याम सुंदर , इस्कान मंदिर वृन्दावन, तिथि 15.04.2010 के दर्शन (vrindavan darshan से साभार ).

शनिवार, 17 जनवरी 2009

मेरा भारत

मुझे है जान से प्यारा , मेरा भारत,मेरा भारत,
है जग की आँख का तारा ,मेरा भारत, मेरा भारत

शहीदों ने बहाकर खूं, जिसे दिलवाई आजादी
भगत सिंह ,राज और सुखदेव ने की ,मौत से शादी
वही है राम का, गोविन्द का, भारत ,मेरा भारत
मुझे है.........................................................

हिमालय है मुकुट जिसका, चरण धोता रहा सागर
विवेकानंद ने जिसके, जगाया दुनिया को जाकर
वही गंगा का, यमुना का , मेरा भारत, मेरा भारत
मुझे है.........................................................

जहाँ गौतम ने, नानक ने, बहाई प्रेम की धारा
किशन का जन्म होता है, जहाँ पर तोड़ कर कारा
वही मीरा का तुलसी का , मेरा भारत, मेरा भारत
मुझे है.........................................................

इसे सोने की चिडिया दोस्तों, मिलकर बनायें हम
मिटायें पाप भ्रष्टाचार , लोगों के मिटायें गम
जो है, बापू का, नेहरू का, "स्वप्न" भारत, मेरा भारत
मुझे है..............................................................

सदा संसार को देता रहा, जो ज्ञान सदियों से
जिसे है देवताओं का अमर, वरदान सदियों से
मिटा है ना मिटेगा, है, गुरुद्वारा, मेरा भारत
मुझे है..............................................................

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सात आठ वर्ष पहले की यह रचना बेटे को स्कूल में सुनाने के लिए लिख कर दी थी।
बेटा अब भारतीय नौसेना में है और २००९ की २६ जनवरी की परेड में हिस्सा ले रहा है।
२६ जनवरी के उपलक्ष्य में यह आप सब को समर्पित है। बेटे को आशीर्वाद दें। धन्यवाद

हमको मनमोहन से ...(एक भजन)

हमको मनमोहन से मिलवाय दो , किशोरी राधे प्यारी
हमको मनमोहन से मिलवाय दो , किशोरी राधे प्यारी
किशोरी राधे प्यारी , प्यारी बरसाने वारी
एक बार दरस तो करवाय दो , किशोरी राधे प्यारी
हमको मन मोहन से..............................................

सुनते हैं पहचान तुम्हारी ,मनमोहन से है जन्मों की
कृपा करो हम पर भी अब तो , जला दो गठरी सब कर्मों की
पहचान हमारी करवाय दो, किशोरी राधे प्यारी
किशोरी राधे प्यारी, प्यारी बरसाने वारी
हमको मन मोहन.....................................................

एक इशारा काफ़ी है बस, तेरा ओ मोहन की प्यारी
दया दृष्टि हम पर भी कर दो, कृष्ण -प्रिया वृषभान-दुलारी
मोहन से नयना मिलवाय दो , किशोरी राधे प्यारी
किशोरी राधे प्यारी,प्यारी बरसाने वारी
हमको मनमोहन से.................................................

हम भी सीखें प्रीत की भाषा, पूरी हो जन्मों की आशा
इच्छाएं मिट गई हैं सारी , श्याम मिलन की बस अभिलाषा
वंशी की धुन तो सुनवाय दो , किशोरी राधे प्यारी
किशोरी राधे प्यारी, प्यारी बरसाने वारी
हमको मनमोहन से...............................................

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बुधवार, 14 जनवरी 2009

मैंने जितना.....................

मैंने जितना तुम्हें मनाया है
उतने तुम रूठ -रूठ गए

फ़िर भी हर बार मैंने कोशिश की
दिल के सब स्वप्न टूट-टूट गए

तुम ना आए, ना तुम को आना था
वादा करके क्यूँ झूठ -मूठ गए

एक दिल का गुरूर था हमको
वो भी तुम लूट-लूट गए

इश्क का एक रिश्ता कायम है
बाकी नाते तो टूट-फूट गए

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सोमवार, 12 जनवरी 2009

कान्हा हमें भी सुना दे..............

कान्हा हमें भी सुना दे एक बार बंसरी
कान्हा हमें भी सुना दे एक बार बन्सरी

राधा को सुनावे तू गोपी को सुनावे तू
भक्तों को सुनावे तू संतों को सुनावे तू
हम भी तो करे हैं तोसे प्यार बंसरी
कान्हा हमें................................................

नाम से पुकारे तेरी बंसरी में जादू है
जिसे वो पुकारे बड़े भाग वाला साधू है
हमें भी पुकारे एक बार बंसरी
कान्हा हमें................................................

नाचती है राधा तेरी बांसुरी की धुन पर
नाचती है गोपी तेरी बांसुरी को सुनकर
जिसे सुन नाचे संसार बंसरी
कान्हा हमें.............................................

सुनते ही रहें तेरी बंसरी की तान को
भूल जायें सारे जग के अभिमान को
हर जनम सुनें बार -बार बंसरी
कान्हा हमें............................................



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रविवार, 11 जनवरी 2009

मुझसे मिलकर ही....................

मुझसे मिलकर ही मिटेंगी आपकी सब उलझनें
सब गिले-शिकवे मिटाने आइये आ जाइए

हैं खफा हमसे अगर तो क्यूँ खफा हैं बोलिए
दिलकी सब हमको सुनाने आइये आ जाइए
मुझसे...............................................

दिल की बस्ती के उजड़ जाने का है हमको मलाल
दिल से उजड़ा दिल मिलाने आइये आ जाइए
मुझसे...................................................

कर दीं सब रब के हवाले हमने अपनी रंजिशें
याद जन्मों की भुनाने आइये आ जाइए
मुझसे........................................................

आओ अब मिलकर चलेंगें दूर दुनिया से कहीं
प्रीत का अमृत पिलाने आइये आ जाइए
मुझसे...........................................................

बाद-ऐ-मुद्दत गले मिलकर आओ अब रोएँ रुलाएं
"स्वप्न" के टुकड़े सजाने आइये आ जाइए
मुझसे........................................................

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