उपरोक्त शीर्षक चित्र श्री श्री राधा श्याम सुंदर , इस्कान मंदिर वृन्दावन, तिथि 15.04.2010 के दर्शन (vrindavan darshan से साभार ).

सोमवार, 23 फ़रवरी 2009

खता हमसे ही हो गई होगी..............................

खता, हमसे ही हो गई होगी
वरना वो दूर क्यूँ गए होते

पीर आंखों ने कुछ सही होगी
वरना यूँ अश्क क्यूँ बहे होते

दिल में उनके अगर जगह मिलती
चैन से हम भी रह रहे होते

साथ अपनों का मिल गया होता
आज अपने भी कहकहे होते

बात गर खोलते ना हम उनसे
दिलके जज्बात अनकहे होते

स्वप्न सच्चे जो हो गए होते
दर्द हमने यूँ सहे होते

उनकी यादों ने कुछ उबारा है
वरना हम कब के मर गए होते

हमपे दीवानगी जो छा जाती
अच्छे अशआर कुछ कहे होते

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13 टिप्‍पणियां:

Puneet Sahalot ने कहा…

namastey uncle...!!
bahut hi achhi kavita hai.

बात गर खोलते ना हम उनसे
दिलके जज्बात अनकहे होते

jo jazbaat kisi se kahe na jaye,
jab koi unhe mehsus na kare tab tak wo jazbaat, jazbaat nahi kehlaate.

is baar meri post bhi kuchh isse milti jhulti hi hai.
padhiyega. aapka swagat hai.

:)

दिगम्बर नासवा ने कहा…

उनकी यादों ने कुछ उबारा है
वरना हम कब के मर गए होते
नमस्कार
स्वपन जी खूबसूरत रचना है ये, पूरी की पूरी अभिव्यक्ति बहुत सुंदर है, कुछ पंक्तियाँ तो ख़ास हैं

विष्णु बैरागी ने कहा…

अच्‍छे अशआर। कहीं न कहीं अपने से लगने वाले।

Udan Tashtari ने कहा…

दिल में उनके अगर जगह मिलती
चैन से हम भी रह रहे होते

-बहुत खूब!!

"अर्श" ने कहा…

उनकी यादों ने कुछ उबारा है
वरना हम कब के मर गए होते

kya baat hai behad khubsurat bhav ke sath behatar rachna.... wakai kuchh panktiyan to lahaje me lipati hui hai ... dhero badhai kubul karen...


arsh

अल्पना वर्मा ने कहा…

'उनकी यादों ने कुछ उबारा है
वरना हम कब के मर गए होते'

'साथ अपनों का मिल गया होता
आज अपने भी कहकहे होते'
wah!
bahut khuub!
sundar rachna hai.

vandana ने कहा…

waah waah...bahut khoob

title ne hi sab kah diya.

Puneet Sahalot ने कहा…

uncle ise to main 'ultimate creation' kahunga... baar baar padh raha hoon... bahut hi achhi h.
:)

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र ने कहा…

खूबसूरत रचना.

विनय ने कहा…

सच्ची भावना से ओत-प्रोत रचना

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चाँद, बादल और शाम

amitabhpriyadarshi ने कहा…

Rachana ki gambhirta ko rachana ki gahrai me ja kar hi samjha ja sakata hai.
aankhe peer kahane ki sabse saskt madhyam hain .

पीर आंखों ने कुछ सही होगी
वरना यूँ अश्क क्यूँ बहे होते
badi khubsurat panktiyaan hain bhai.

बात गर खोलते ना हम उनसे
दिलके जज्बात अनकहे होते

हमपे दीवानगी जो छा जाती
अच्छे अशआर कुछ कहे होते

dhanyawaad.

Suresh Chnadra Gupta ने कहा…

अति सुन्दर.

hem pandey ने कहा…

'हमपे दीवानगी जो छा जाती
अच्छे अशआर कुछ कहे होते'
-बिना दीवानगी छाये ही इतने अच्छे अशआर कहे हैं.दीवानगी छा जाने पर न जाने क्या होता .