उपरोक्त शीर्षक चित्र श्री श्री राधा श्याम सुंदर , इस्कान मंदिर वृन्दावन, तिथि 15.04.2010 के दर्शन (vrindavan darshan से साभार ).

शनिवार, 17 अप्रैल 2010

आ भी जाओ


आ भी जाओ (भजन)

जब तड़प उठ ही गई है, तुमको पाने कि ह्रदय में
दूर तुम रह ना सकोगे , श्याम मेरे आ भी जाओ

हम तुम्हारे हो चुके  , क्यूँ तुम मेरे होते नहीं
गैर तुम कह ना सकोगे , श्याम मेरे आ भी जाओ

ये मिलन कि चाह मेरी , ये विरह कि पीर मेरी
और तुम सह ना सकोगे, श्याम मेरे आ भी जाओ

बिन तुम्हारे रह रहे हैं  , बन के आंसू बह रहे हैं 
तुम मगर बह ना सकोगे, श्याम मेरे आ भी जाओ.

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20 टिप्‍पणियां:

दिलीप ने कहा…

jay shri krishna ..bahut khoob yogesh ji....

http://dilkikalam-dileep.blogspot.com/

राजेश स्वार्थी ने कहा…

सुन्दर भजन! आभार!

Udan Tashtari ने कहा…

आनन्द आ गया भजन पढ़ कर.

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

बहुत दिन बाद फिर से आपकी रचना पढने का मौका मिल रहा है, और हमेशा की तरह ही बहुत सुन्दर रचना है । भक्ति रस में ओतप्रोत मन की व्याकुलता को कितना सुन्दर ढंग से प्रस्तुत किया है आपने । मन को मोह लिया ।

अल्पना वर्मा ने कहा…

सांवरे सलोने गिरधर के प्रेम में यह भीगी रचना उनसे मिलने को अधीर मन की पुकार है.
ईश्वर के प्रति आस्था प्रकट करती हुई यह अभिव्यक्ति ईश्वर के प्रति आस्था प्रकट करती हुई मन को छू गयी.
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[आप की टिप्पणी मिली,आप ने सही कहा जब ऐसी स्थिति हो तो ईश्वर पर छोड़ देना चाहिये.आभार आप का.]

M VERMA ने कहा…

भक्तिमय रचना के आप तो माहिर हो चुके है
सुन्दर रचना

sangeeta swarup ने कहा…

भक्तिरस में पगी सुन्दर रचना...

वन्दना ने कहा…

भक्ति रस से ओत प्रोत बहुत ही सुन्दर भजन्।

hem pandey ने कहा…

प्रियतम (ईश्वर) पर इतना विश्वास ही प्रेम(भक्ति) का आधार है.

ज्योति सिंह ने कहा…

ये मिलन कि चाह मेरी , ये विरह कि पीर मेरीऔर तुम सह ना सकोगे, श्याम मेरे आ भी जाओ
बिन तुम्हारे रह रहे हैं , बन के आंसू बह रहे हैं तुम मगर बह ना सकोगे, श्याम मेरे आ भी जाओ.
kai baar aakar laut gayi .lambe antraal ke baad ye sundar bhajan padhne ko mila .ati uttam .

सुमन'मीत' ने कहा…

कृष्ण रस की अमृत धारा बहुत सुन्दर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत बढ़िया भजन!
हमारा कीर्तन तो यहीं हो गया!

मिलिंद / Milind ने कहा…

भजन पसंद आया.

कविता रावत ने कहा…

भक्तिरस में डूबी सुन्दर भावपूर्ण रचना ....
बहुत शुभकामनाएँ

दिगम्बर नासवा ने कहा…

ये मिलन कि चाह मेरी , ये विरह कि पीर मेरी
और तुम सह ना सकोगे, श्याम मेरे आ भी जाओ

प्रीत तो प्रीत है ... फिर प्रभू से प्रीत तो भव-सागर पार करा कर ही दम लेगी ...
बहुत ही सुंदर भजन है स्वपन जी ...

अरुणेश मिश्र ने कहा…

प्रशंसनीय ।

kshama ने कहा…

Bahut bhavuk bhajan..baar,baar padhte rahne ka man kar raha hai..

आशीष/ ASHISH ने कहा…

क्या बात है!
मेरी भी अर्जी लगा लीजिये! ये मेरे फैवरेट भगवान हैं! विलक्षण प्रतिभा के धनि, माखनचोर, मुरलीधर, रास-रचिय्या, प्रेमी, और गीतोपदेश देने वाले भी!
जय श्री कृष्ण!!!

shama ने कहा…

Kya kahun? Behad khoobsoorat rachna!

बेचैन आत्मा ने कहा…

सुंदर भजन.