उपरोक्त शीर्षक चित्र श्री श्री राधा श्याम सुंदर , इस्कान मंदिर वृन्दावन, तिथि 15.04.2010 के दर्शन (vrindavan darshan से साभार ).

बुधवार, 1 जुलाई 2009

कौन है?

कौन है ईश्वर कभी जब सोचता हूँ
स्वयं से ही प्रश्न कितने पूछता हूँ

कौन है सृष्टि को रचता जा रहा है
कौन जो देहों में बसता रहा है

किसके आदेशों से पृथ्वी घूमती है
किसके डर से सूर्य तपता रहा है

कौन आंधी और तूफां को चलाता
ज्वालामुखी पर्वत को जो पिघला रहा है

कौन सुनता है ह्रदय की चीत्कारें
अपने भक्तों पर कृपा बरसा रहा है

14 टिप्‍पणियां:

M Verma ने कहा…

sarthak prashn: samarpit prashan
bahut khoob yogesh jee

Nirmla Kapila ने कहा…

ैआपके अध्यात्म रस मे हम भी डूब गये बहुत सुन्दर कविता है जन आदमी ऐसे उतर खोजने लगता है तभी् उसे भगवान को समझते देर नहीं लगती पर आज कल की भागदौड मे समय किस के पास है खुद से सवाल कर्ने का बहुत बहुत बधाई

ओम आर्य ने कहा…

wahi sarwshaktimaan hai.............jo hame taakat deta hai bure wakt se ladane ka............badhiya

दिगम्बर नासवा ने कहा…

ऐसे ही prashnon के uttar dhoondhti है poori duniyaa................ जो oopar vaale की satta को मान letaa है.......... उसे इन prashnon के uttar की jaroorat नहीं होती

नीरज गोस्वामी ने कहा…

आप ने बहुत शाश्वत प्रश्न पूछें हैं...जिनका जवाब किसी के पास नहीं है....सुन्दर रचना...
नीरज

रंजना ने कहा…

वाह !! पवित्र अतिसुन्दर चिंतन ....बहुत ही सुन्दर इस रचना हेतु आभार.

"अर्श" ने कहा…

WAKAI RANJANAA JI NE SAHI KAHAA HAI KE AISI RACHANAAWO KO PAVITRA RACHNAA KAHNI CHAHIYE... BAHOT BAHOT BADHAAYEE


ARSH

vandana ने कहा…

sarvshaktiman hai wo.........sab jante hain magar manna nhi chahte .........dhoondhne wale ko hi mila karta hai wo.

vandana ने कहा…

bahut bahut bahut sunder or ak dam sacchi ..man ko choone vali rachna hai sir ......badhai
कौन सुनता है ह्रदय की चीत्कारें
अपने भक्तों पर कृपा बरसा रहा है।

hem pandey ने कहा…

ये प्रश्न भूत में भी पूछे गए थे और भविष्य में भी पूछे जायेंगे. सुंदर अभिव्यक्ति.

Puneet Sahalot ने कहा…

namastey uncle..
kya baat h aajkal aap blog par nahin aate hain... kaafi din ho gaye... ??

hmm... kon h..?? manthan, chintan sb kuch karenge tab bhi shayad pata na chale...

ALOK PURANIK ने कहा…

बहुत गहराई लिये हुए रचना योगेशजी।

दर्पण साह "दर्शन" ने कहा…

ye sab to yaksh prashan ki tarah chuubh rahe hain !!

vedantijeevan ने कहा…

HARI OM!

बहुत अच्छी रचना है। वेदान्त इन सभी प्रश्नो का उत्तर प्रदान करता है।
मन और बुद्धि इन सभी प्रश्नो का उत्तर पाकर शान्त हो जाती है। उसके बाद शरीर प्रभु के उदय के लीए तैयार होता है।

www.vedantijeevan.com

Love and Om!