उपरोक्त शीर्षक चित्र श्री श्री राधा श्याम सुंदर , इस्कान मंदिर वृन्दावन, तिथि 15.04.2010 के दर्शन (vrindavan darshan से साभार ).

मंगलवार, 28 जुलाई 2009

शोक (प्रार्थना)

मेरे पिताजी जो २८.०६.2008 से बीमार , अस्पताल में थे , का देहांत १३.०७.२००९ सोमवार को हो गया, उन्हें बचाने के सभी प्रयत्न विफल हुए, शायद यही ईश्वर की इच्छा थी.
एक प्रार्थना , मेरी छोटी बहिन सुनीता वर्मा द्वारा लिखित , जो अध्यापिका है।

ना हमारे पास स्वर ना शब्द के भण्डार हैं

ना हमारे पास स्वर ना शब्द के भण्डार हैं
गा रहे हैं जो ह्रदय के भाव हैं उदगार हैं

ना दिया बाती जला कर आरती को लाये हैं
नयन के दीपक में तेरी ज्योत के आधार हैं

फूल भी कोई नहीं चरणों में जो अर्पण करें
दो सुमन लाये हैं एक श्रद्धा है दूजा प्यार है

रूप गुण तेरे प्रभु हम गान कर सकते नहीं
नाम तेरे अनगिनत अनगिन तेरे आकार हैं

द्वार तेरा छोड़ कर किस ठौर जाएँ हम भला
एक तुम ही बंधु हो बैरी सकल संसार है

प्रार्थना ये है हमारी ज्ञान हमको दीजिये
निज शरण ले लीजिये प्रभुजी तो बेडा पार है.

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17 टिप्‍पणियां:

संगीता पुरी ने कहा…

ब्‍लाग जगत से आपकी अनुपस्थिति काफी दिनो से दिख रही थी .. बहुत दुख हुआ आपके पिताजी के बारे में सुनकर .. ईश्‍वर आप लोगों को इस कष्‍ट से उबरने की शक्ति दे .. उनकी आत्‍मा को शांति भी .. आपकी बहन ने इस प्रार्थना में मन के सारे उद्गार को व्‍यक्‍त कर दिया है .. बहुत सुंदर लिखा है !!

ALOK PURANIK ने कहा…

मार्मिक कविता है। सत्य वचन है-द्वार तेरा छोड कर किस ठौर जाएं हम भला, एक तुम ही बंधु हो, बैरी सकल संसार है।

समयचक्र : महेन्द्र मिश्र ने कहा…

आपके पापाजी के निधन का समाचार सुनकर बहुत दुःख हुआ . उन्हें विनम्र श्रद्धासुमन अर्पित करता हूँ . इश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें . ॐ शांति ॐ

समयचक्र : महेन्द्र मिश्र ने कहा…

आपके पापाजी के निधन का समाचार सुनकर बहुत दुःख हुआ . उन्हें विनम्र श्रद्धासुमन अर्पित करता हूँ . इश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें .

दिगम्बर नासवा ने कहा…

स्वपन जी ....... जान कर बहुत अफ़सोस हुवा आपके पिता जीके बारे में............... भगवान् उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करे और आपको इस कष्ट को सहने की हिम्मत दे.........

अल्पना वर्मा ने कहा…

योगेश जी यह तो दुःख का समाचार दिया आप ने.इसी कारन
बहुत दिनों से आप की आप के ब्लॉग पर अनुपस्थिति थी.
ईश्वर आप और आप के परिवार को इस दुःख की घडी से उबरने की
हिम्मत दे .
आप के पिताजी को हमारी श्रद्धांजलि.

‘नज़र’ ने कहा…

बहुत ही दुखद समाचार है, आपकी यह कविता सच्चा तर्पण है!
भगवान आपके पिता श्री की आत्मा को मोक्ष दे!
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Udan Tashtari ने कहा…

संपूर्ण समर्पण भाव लिए रचना.

दुखद समाचार. पिता जी श्रृद्धांजलि.

नीरज गोस्वामी ने कहा…

दुःख की इस घडी में इश्वर आपको संबल दे और मृतक की आत्मा को शांति...
नीरज

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

पिताजी को हमारी श्रद्धांजलि!
दुख की इस घड़ी में हम आपके साथ हैं।
परमपिता परमात्मा पिता जी की आत्मा को
शान्ति एवं सदगति प्रदान करें।

"अर्श" ने कहा…

नमस्कार ,
अत्यंत दुखद खबर है हमारे लिया आपके साथ साथ... आपकी अनुपस्थिति तो खल ही रही थी और मन कहीं ना कहीं संकोच और संदेह में तो था ही...
आपके पिता जी के आत्मा को ऊपर वाला शांति दे और आपको इस गंभीर शोक से ऊपर आने में प्रभु आपको साहस दे....
मगर आज आपसे मिल के बहोत अच्छा लगा ..... साधारण सा दिखने वाला इंसान कितना आसाधारण हो सकता है ये आपसे मिलकर ही पता चलता है.. आपकी आवाज़ में ये प्राथना सुन के बहोत अच्छा लगा आज ... सलाम उनको.. आपको सादर प्रणाम और आपके पिता जी को नमन...


अर्श

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

आपके पिताजी को श्रधांजलि |

संजीव गौतम ने कहा…

पिता के न रहने का समाचार पढकर अच्छा नहीं लगा. 'पिता बूढा है कि कुछ दिन का कहो मेहमान सा है. रात के सूने पहर में एक आतिशदान सा है.' पिता का न रहना कितनी रिक्तता देता है व्यक्त नहीं कर सकता. खैर जैसी प्रभु की इच्छा...

vandana ने कहा…

yogesh ji
kafi dino se aapki anupasthiti khal rahi thi.........aapke pitaji ke bare mein sunkar dukh hua.........ishewar unki aatma ko shanti pradan karein aur aapko bhi is sanka tki ghadi se ubarne mein madad kare..........kavita ya kaho prarthna bahut hi bhavpoorna hai.

M VERMA ने कहा…

स्वप्न जी
दु:ख की इस बेला मे आप सबल हो और परिवारजनो को सम्बल दे सकने मे सक्षम हो सके यही कामना कर सकता हू.
आपके इस असहनीय दु:ख मे शरीक मै
M Verma

Prem Farrukhabadi ने कहा…

swapn ji ,
bada dukh hua apke pita ji ka asamay nidhan jaan kar.eshwar aapko shakti de is dukh se ubarne ke liye. apka dukh asahneey hai.

ओम आर्य ने कहा…

bhagawan pitaji ke aatma ko shanti de .......our aapako takat.......bahan ji ki rachana bahut hi achchhi hai