उपरोक्त शीर्षक चित्र श्री श्री राधा श्याम सुंदर , इस्कान मंदिर वृन्दावन, तिथि 15.04.2010 के दर्शन (vrindavan darshan से साभार ).

मंगलवार, 5 जनवरी 2010

ना भुला सका

लीजिये एक और रचना पुरानी डायरी से.


ना भुला सका 

मैंने तेरी राह ना देखी,
इंतज़ार भी नहीं किया
सच कहता हूँ ,दिल से, मैंने
तुझको प्यार भी नहीं किया
फिर भी जाने क्या कारण है तुझको मैं ना भुला सका

तुझसे कभी ना मिलना चाह
तेरा रूप ना कभी सराहा
वफ़ा की कोई कसम ना खाई
वादा कोई नहीं किया
फिर भी जाने क्या कारण है तुझको मैं ना भुला सका

तेरे लिए कोई गीत ना गाया
कोई फ़साना नहीं बनाया
दीवाना ना बनकर भटका
तुझको रुसवा नहीं किया
फिर भी जाने क्या कारण है तुझको मैं ना भुला सका

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15 टिप्‍पणियां:

अजय कुमार ने कहा…

आत्मिक लगाव छिपा है इसमें

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सुंदर अभिव्‍यक्ति !!

वन्दना ने कहा…

waah..........bahut sundar abhivyakti.........kabhi kabhi aisa bhi hota hai.

संदीप 'शालीन ' ने कहा…

bahut hi sundar rachana,dil ko chhoo gai,badhai swikare!

निर्मला कपिला ने कहा…

स्वपन जी बहुत खूबसूरत रचना है । बहुत बहुत बधाई

M VERMA ने कहा…

तुझको प्यार भी नहीं किया
फिर भी जाने क्या कारण है तुझको मैं ना भुला सका
बहुत कुछ अकारण भी तो होता है
बहुत अच्छी रचना

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सच कहता हूँ ,दिल से, मैंने
तुझको प्यार भी नहीं किया
फिर भी जाने क्या कारण है तुझको मैं ना भुला सका

बहुत लाजवाब बात कही है स्वपन जी ... कभी कभी ना चाहते हुवे भी इंसान भूल नही पाता ...... आपको नव वर्ष की बहुत बहुत शुभकामनाएँ ........

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

पुराने चावलों की महक बरकरार है जी!
बढ़िया रचना है!

वाणी गीत ने कहा…

रुसवा नहीं किया , गीत नहीं गाया ,
प्यार तो किया ...काफी होगा इतना भी ....!!

सर्वत एम० ने कहा…

सर्वप्रथम नव वर्ष की हार्दिक शुभकानाएं.
बहुत दिनों के बाद आया हूँ, क्षमा प्रार्थी हूँ.
आपकी यह रचना इतनी मनोवैज्ञानिक है कि मन झूम गया. सच, हमारी ज़िन्दगी में ऐसे अनेक अवसर आते हैं जिनमें ऐसी ही स्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं. आपने इतने बारीक मुद्दे को उठाया कि मैं तो चकित रह गया.
बाकी हाल चाल कैसा है, अवगत कराईयेगा. अभी कोई नई पोस्ट नहीं डाली है. नई पोस्ट की सूचना दूंगा.

ज्योति सिंह ने कहा…

मैंने तेरी राह ना देखी,
इंतज़ार भी नहीं किया
सच कहता हूँ ,दिल से, मैंने
तुझको प्यार भी नहीं किया
फिर भी जाने क्या कारण है तुझको मैं ना भुला सका
bahut hi sundar ,old is gold aese nahi kahte

shama ने कहा…

Kitnee saraltaa se ek mushkil baat kah dee aapne!

Devendra ने कहा…

वाह.

psingh ने कहा…

स्वप्न जी
बहुत सुन्दर रचना
साथ में कृष्ण और राधा की तस्वीर बहुत सुन्दर.......
बहुत बहुत आभार ........

Prem Farrukhabadi ने कहा…

aapne jo mahsoos kiya hai yahi to pyaar hai dost. pyaar to anubhooti hai.kahne kii jaroorat nahin padti. mubaarak ho!!