सहज मिलेंगे श्याम प्यार करके तो देखो

सहज मिलेंगे श्याम प्यार करके तो देखो

सहज मिलेंगे श्याम प्यार करके तो देखो
उसकी खातिर कभी आँख भर के तो देखो

सिर्फ प्यार का भूखा है  मेरा ठाकुर
मेरी बात पर ऐतबार करके तो देखो

आएगा , आता है," वो" सबका प्रेमी
मन -मंदिर अपना बुहार करके तो देखो

न्यौछावर कर दो, उस पर, सब कुछ अपना
सोचो मत बस एक बार करके तो देखो

छिपा हुआ है वही तुम्हारे तन मन में
नयन मूँद उसको निहार करके तो देखो

कभी तो रोओ तड़पो उसको पाने को
मेरी बातों पर विचार करके तो देखो

"स्वप्न" मिल गई है बहार, उसको पाकर
जीवन अपना भी, बहार करके तो देखो  

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2 टिप्पणियाँ:

kshama ने कहा…

Pyaar hee to nahee karte ham!

मिलिंद / Milind ने कहा…

बहुत खूब. कविता पसंद आयी.

 

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