उपरोक्त शीर्षक चित्र श्री श्री राधा श्याम सुंदर , इस्कान मंदिर वृन्दावन, तिथि 15.04.2010 के दर्शन (vrindavan darshan से साभार ).

सोमवार, 29 दिसंबर 2008

अब तो बेहतर है................

अब तो बेहतर है हमें तुम भूल जाओ
न कभी लब पर हमारा नाम लाओ
अब तो ...........................................

टूटे स्वप्नों का महल खंडहर हुआ
हार बैठे हम ये जीवन का जुआ
सारे गम दे दो हमें खुशियाँ मनाओ
अब तो ..........................................

वो पुराने दिन न लौटेंगे दुबारा
वो गली वो छत वो पीपल वो चौबारा
लूट कर मुझको लो अपना घर सजाओ
अब तो.............................................

जिंदगी सारी गुजारी है विरह में
याद के नश्तर से चुभते हैं ह्रदय में
अब न ज़ख्मों पर मेरे मरहम लगाओ
अब तो.............................................

1 टिप्पणी:

Amit ने कहा…

जिंदगी सारी गुजारी है विरह में
याद के नश्तर से चुभते हैं ह्रदय में
अब न ज़ख्मों पर मेरे मरहम लगाओ...

बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति ......