उपरोक्त शीर्षक चित्र श्री श्री राधा श्याम सुंदर , इस्कान मंदिर वृन्दावन, तिथि 15.04.2010 के दर्शन (vrindavan darshan से साभार ).

बुधवार, 31 दिसंबर 2008

तड़प -२ के गा रहा है................

तड़प-२ के गा रहा है, गीत कोई प्यार के
क्यूँ खिजां को आ रहे हैं याद दिन बहार के

खुशबुओं को ले गया कोई चमन उजाड़ के
जी रहा है आज कोई अपने मन को मार के
तड़प..................................................

चल पड़े हैं साथ कई काफिले उधर के
बस वही नहीं है जिसको हो सुकून निहार के
तड़प...............................................

क्या बचा है जिंदगी में जिंदगी गुज़र के
एक बार देख जाओ बस कफ़न उतर के
तड़प.................................................

"स्वप्न" टूट -२ कर इस कदर बिखर गया
जैसे पारा फ़ैल जाए फर्श पर बुखार के
तड़प.................................................

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3 टिप्‍पणियां:

mehek ने कहा…

bahut khubsurat nazam,bahut badhai,naya saal mubarak.

कंचन सिंह चौहान ने कहा…

वाह वाह वाह..हर शेर भावपूर्ण....! बहुत अच्छे....!

shweta ने कहा…

very nice aap itne ghere shabd kaise likh lete