उपरोक्त शीर्षक चित्र श्री श्री राधा श्याम सुंदर , इस्कान मंदिर वृन्दावन, तिथि 15.04.2010 के दर्शन (vrindavan darshan से साभार ).

रविवार, 11 जनवरी 2009

मुझसे मिलकर ही....................

मुझसे मिलकर ही मिटेंगी आपकी सब उलझनें
सब गिले-शिकवे मिटाने आइये आ जाइए

हैं खफा हमसे अगर तो क्यूँ खफा हैं बोलिए
दिलकी सब हमको सुनाने आइये आ जाइए
मुझसे...............................................

दिल की बस्ती के उजड़ जाने का है हमको मलाल
दिल से उजड़ा दिल मिलाने आइये आ जाइए
मुझसे...................................................

कर दीं सब रब के हवाले हमने अपनी रंजिशें
याद जन्मों की भुनाने आइये आ जाइए
मुझसे........................................................

आओ अब मिलकर चलेंगें दूर दुनिया से कहीं
प्रीत का अमृत पिलाने आइये आ जाइए
मुझसे...........................................................

बाद-ऐ-मुद्दत गले मिलकर आओ अब रोएँ रुलाएं
"स्वप्न" के टुकड़े सजाने आइये आ जाइए
मुझसे........................................................

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6 टिप्‍पणियां:

समयचक्र - महेद्र मिश्रा ने कहा…

मुझसे मिलकर ही मिटेंगी आपकी सब उलझनें
सब गिले-शिकवे मिटाने आइये आ जाइए
yogesh ji
bahut badhiya manamohak rachana .

Vidhu ने कहा…

हैं खफा हमसे अगर तो क्यूँ खफा हैं बोलिए
दिलकी सब हमको सुनाने आइये आ जाइए
मुझसे...............................................badhai

"अर्श" ने कहा…

मक्ता तो कमाल का लिखा है आपने मेरे नए ग़ज़ल पे आपकी उपस्थति लाज़मी है स्वप्न साहब..


अर्श

विनय ने कहा…

सहज और सरल कविता पर आपको बधाई

---मेरा पृष्ठ
गुलाबी कोंपलें

कंचन सिंह चौहान ने कहा…

हैं खफा हमसे अगर तो क्यूँ खफा हैं बोलिए
दिलकी सब हमको सुनाने आइये आ जाइए

bahut khoob...!

hem pandey ने कहा…

'दिल की बस्ती के उजड़ जाने का है हमको मलाल
दिल से उजड़ा दिल मिलाने आइये आ जाइए'

-सुंदर पंक्तियाँ.