उपरोक्त शीर्षक चित्र श्री श्री राधा श्याम सुंदर , इस्कान मंदिर वृन्दावन, तिथि 15.04.2010 के दर्शन (vrindavan darshan से साभार ).

रविवार, 15 मार्च 2009

"बड़ा महत्व है"

"बड़ा महत्व है" दिसम्बर २००५ के यूनियन बैंक दिल्ली से निकलने वाली "बैंक प्रतिभा" नामक पत्रिका में मेरा यह प्रयोग छापा था , स्टाफ को और अन्य पाठकों को रुचिकर लगा, ग़ज़ल आदि से हटकर , सोचा आपको भी इससे परिचित करा दूँ , आशा है आपको पसंद आएगा। योगेश वर्मा "स्वप्न"


बैंक में प्रधान का
पुण्यों में दान का
खाने में पान का
आदमी में जान का
बड़ा महत्व है

मीठे में मधु का
शादी में वधु का
मन्दिर में साधू का
बड़ा महत्व है

गोपिओं में राधा का
रेस में बाधा का
रिश्वत में ज़्यादा का
बड़ा महत्व है

देवों में श्याम का
साधना में नाम का
वासना में काम का
बड़ा महत्व है

धूम्रपान में बीडी का
फिल्मों में सीढ़ी का
परिवार में पीढी का
बड़ा महत्व है

यात्रा में ट्रेन का
गर्मी में रैन का
आदमी में ब्रेन का
बड़ा महत्व है

गीता में योगी का
क्लीनिक में रोगी का
नरक में भोगी का
बड़ा महत्व है

शब्दों में ॐ का
सोफे में फोम का
ड्रिंक्स में सोम का
बड़ा महत्व है

कविता में लिखने का
फैशन में दिखने का
लड़कों में चिकने का
बड़ा महत्व है

जीवन में प्यार का
छोटे परिवार का
छुट्टी में रविवार का
बड़ा महत्व है

दानियों में कर्ण का
कलियुग में स्वर्ण का
रिश्तों में वर्ण का
बड़ा महत्व है

क्लास में मॉनिटर का
सर्दी में स्वेटर का
रोमांस में लैटर का
बड़ा महत्व है

किचन में पौनी का
बिजनेस में बौनी का
किरकेट में धोनी का
बड़ा महत्व है

बन्दूक में गोली का
मुंबई में खोली का
आक्शन में बोली का
बड़ा महत्व है

भोजन में प्रोटीन का
पानी में क्लोरिन का
लड़कियों में नमकीन का
बड़ा महत्व है

देविओं में काली का
बागों में माली का
जीजों में साली का
बड़ा महत्व है

भाभिओं में देवर का
सावन में घेवर का
शादी में जेवर का
बड़ा महत्व है

सर्विस में आई.ऐ एस का
मोबाइल में एम् एम् एस का
बी जे पी में आर एस एस का
बड़ा महत्व है

संचार में फेक्स का
एक्टिंग में सेक्स का
वेतन में टैक्स का
बड़ा महत्व है

कवियों में छपने का
नींद में सपने का
जिंदगी में अपने का
बड़ा महत्व है


और आगे भी हैं लेकिन फिलहाल यही काफी हैं.

गुरुवार, 12 मार्च 2009

अब तो हमने ................

अब तो हमने, चाँद अपना कर लिया
हाँ, हकीकत ,एक सपना कर लिया

अब गुलों पर राज अपना हो गया
सारा गुलशन खुशबुओं से भर लिया

अब किराये के बचेंगे कुछ रूपये
ये खुशी है जब से अपना घर लिया

उस रोज़ से कीमत हमारी ना रही
जब से पत्नी ने हमें वर लिया

तुम सलीबों पर चढोगे सोच लो
नाम तुमने प्यार का , भी गर लिया

ढाई अक्षर प्रेम का जिसने जिया
मोक्ष पाया उसने तो, वो तर लिया

*

वो मोहल्ले भर का नेता हो गया
जब से उसने हाथ में खंज़र लिया

हो गई मशहूर उसकी वो ग़ज़ल
जिसमें उसने प्यार का मंज़र लिया

दाने दाने को हुआ मोहताज़ वो
जब से उसने खेत वो बंज़र लिया

असलियत उसकी मुकाबिल गई
जैसे उसने पैग एक अन्दर लिया

परदेस में बेशक वो जाकर बस गए
नाम अपने देश का जमकर किया (लिया)
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सोमवार, 9 मार्च 2009

होली की शुभ कामनाएं

"स्वप्न" के नियमित पाठकों, टिप्पणीकारों, और सभी सम्मानित चिटठा कारों को उनके परिवार सहित मेरी और से होली की शुभ कामनाएं .

सोमवार, 23 फ़रवरी 2009

खता हमसे ही हो गई होगी..............................

खता, हमसे ही हो गई होगी
वरना वो दूर क्यूँ गए होते

पीर आंखों ने कुछ सही होगी
वरना यूँ अश्क क्यूँ बहे होते

दिल में उनके अगर जगह मिलती
चैन से हम भी रह रहे होते

साथ अपनों का मिल गया होता
आज अपने भी कहकहे होते

बात गर खोलते ना हम उनसे
दिलके जज्बात अनकहे होते

स्वप्न सच्चे जो हो गए होते
दर्द हमने यूँ सहे होते

उनकी यादों ने कुछ उबारा है
वरना हम कब के मर गए होते

हमपे दीवानगी जो छा जाती
अच्छे अशआर कुछ कहे होते

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सोमवार, 16 फ़रवरी 2009

मुझसे दूर ना जा ...................

मोहन मोहिनी मूरत मुझे, दिखाकर मुझसे दूर ना जा
मनोहारिणी मुरली मधुर , सुनाकर मुझसे दूर ना जा


तड़पता मुझको यूँ ना छोड़
मुखडा मुझसे यूँ ना मोड़
नाता मुझसे यूँ ना तोड़
हाथ रही तेरे आगे जोड़
मनभावन मधुकर मन मेरा , चुरा कर मुझसे दूर ना जा
मोहन मोहिनी मूरत मुझे..........................................

मन में मुझे बसा लो तुम
जग से मुझे छुडा लो तुम
अपने गले नहीं तो नाथ
अपनी शरण लगा लो तुम
मनमोहन मतवाली मुझे, बना कर मुझसे दूर ना जा
मोहन मोहिनी मूरत मुझे........................................

जनम जनम की दासी हूँ,
प्रेम -सुधा की प्यासी हूँ
मीरा-सी तो मान ले मोहन
बेशक ना राधा-सी हूँ
माधव मेरी मंजिल मुझे , दिखाकर मुझसे दूर ना जा
मोहन मोहिनी मूरत मुझे........................................

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शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2009

तीन लघु रचनाएँ

प्यार में नापो नहीं
प्यार में तोलो नहीं
प्यार में बस चुप रहो
प्यार में बोलो नहीं

प्यार तोहफा रब का है
खुशनसीबों को मिले
प्यार में बस खुश रहो
राज-ऐ-दिल खोलो नहीं

प्यार में है क्या मज़ा
प्यार वाले जानते
प्यार करने दो उन्हें
विष-ज़हर घोलो नहीं

शब्द और संगीत से
गीत होता पूर्ण है
प्यार (दुएत)( सोंग) है (DUET)(SONG)
गीत ये( सोलो) नहीं(SOLO)

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जीवन
एक गीत,
आत्मा
मुखडा,
जन्म
अंतरा,
कर्म
अलंकार,
आंसू और मुस्कान
संगीत,
धुन
सुख दुःख,
श्रोता
जगत,
भाव
"प्रेम"

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नज़र मिली
दीदार हुआ,
दिल धड़का
प्यार हुआ,
शोले भड़के,
इकरार हुआ,
आंसू टपके
----?---- हुआ

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उत्तर ----इनकार

लघु रचना लिखने की कोशिश की है आपको कैसी लगी बताएं। धन्यवाद

गुरुवार, 12 फ़रवरी 2009

मेरे ख्वाबों को ..................

मेरे ख्वाबों को, हकीक़त में बदलने वाले
मेरे हमराज़, मेरे साथ में चलने वाले ।
मेरे ख्वाबों को....................................

हमसफ़र साथ में चलना , ना कहीं खो जाना
मेरे अपने, तू कहीं, गैर नहीं हो जाना
प्यार की लौ में,मेरे साथ में जलने वाले
मेरे ख़्वाबों को......................................

दूर मंजिल है तो क्या, तू है तेरा साथ तो है
मेरे हाथों में मेरे ,दोस्त तेरा हाथ तो है
ठोकरें खा के मेरे साथ, संभलनेवाले
मेरे ख़्वाबों को.....................................

साथ में तू है अगर, मेरे, मुझे क्या गम है
तेरा हमराह हूँ ये , मेरे लिए क्या कम है
मेरे गीतों पे, मेरे साथ, मचलने वाले
मेरे ख़्वाबों को....................................


रचना की तिथि ०८.१२.१९८२

मंगलवार, 3 फ़रवरी 2009

वो चले आए

आज क्या ऐसा हुआ के, वो चले आए
हम भी कुछ हैरां थे कैसे, वो चले आए


क्या सदा सुन ली , उन्होंने प्यार की
कोई ख्वाहिश जागी ,या, दीदार की
याद मेरी आई , क्यूँकर वो चले आए
आज क्या......................................

क्या तड़प मेरी ,उन्हें यूँ, खींच कर लाई
याद मेरी कर, उन्हें , या आई अंगडाई
कच्चे धागे से बंधे-से , वो चले आए
आज क्या.........................................


नींद उनकी खो गई क्या ,स्वप्न से मेरे
बाल बिखरे, कुछ परीशां , नींद के घेरे
कुछ दीवानावार, गाफिल , वो चले आए
आज क्या............................................


मेरे गीतों ने उन्हें , या, दे दिया न्यौता
"इश्क के दरिया " में उनका लग गया गोटा
स्वप्न"-सा मुझको लगे, क्यूँ, वो चले आए
आज क्या..............................................





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बुधवार, 28 जनवरी 2009

देखिये और न ........................

देखिये और ना बेगाना समझिये हमको
प्यार से देखिये दीवाना समझिये हमको

हमसे अब छोड़ भी दो शर्मो-हया जान--जिगर
शम्मां हैं आप तो परवाना समझिये हमको

जो सुराही के लिए छान रहा मैखाने
प्यासा, भटका हुआ, पैमाना समझिये हमको

जिसको अल्लाह ने भेजा है तुम्हारी खातिर
वो ही नाचीज़ सा नजराना समझिये हमको

जिसमें राधा का कन्हैया से मिलन होता है
उससे मिलता हुआ अफसाना समझिये हमको

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मंगलवार, 27 जनवरी 2009

तुम ना आए..............................

तुम ना आए ,जाने वाले , दे के तन्हाई
तुम्हारी याद क्यों आई , तुम्हारी याद क्यों आई


हम भुला बैठे थे अपनी, जिंदगी के गुज़रे दिन
रात जब काटी थी हमने, बिरहा में तारों को गिन
हाय , कैसी चल पड़ी ये, आज पुरवाई
तुम्हारी याद क्यों आई, तुम्हारी याद क्यों आई
तुम ना आए....................................................


क्यों पुराने ज़ख्म ताज़ा ,होके तड़पाने लगे
प्यार के नगमे सभी, ये लोग क्यूँ गाने लगे
इश्क की ये आग किसने,फिर से सुलगाई
तुम्हारी याद क्यों आई, तुम्हारी याद क्यों आई
तुम ना आए...................................................


क्यों वही अरमां, वही फिर, ख्वाब ,क्यूँ आने लगे
दिल के टुकड़े-टुकड़े कैसे, दिल को धड़काने लगे
फिर वही मौसम, वही फिर से घटा छाई
तुम्हारी याद क्यों आई, तुम्हारी याद क्यों आई,
तुम आए...................................................

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