उपरोक्त शीर्षक चित्र श्री श्री राधा श्याम सुंदर , इस्कान मंदिर वृन्दावन, तिथि 15.04.2010 के दर्शन (vrindavan darshan से साभार ).

सोमवार, 5 जनवरी 2009

आपके नज़दीक आने का......................

आपके नज़दीक आने का बहाना चाहिए
जिसमें बुन लूँ आपको वो ताना बाना चाहिए
दोस्त जिसमें तुम ही तुम हो और तुम्हारी बात हो
और तुमको ही सुनाऊं वो तराना चाहिये
आपके.............................................

कैसी जिद है आपकी कुछ सोच कर तो बोलिए
इश्क-ऐ-हकीकी या मिजाजी है अजी कुछ खोलिए
सामने मैं हूँ मगर तुमको दीवाना चाहिए
आपके .........................................................

जाम-ऐ-उल्फत पीते -२ पी गए आब-ऐ-हयात
मैं समाऊँ आप में करते हो क्यूँ छोटी सी बात
अब तो प्रियवर आपको मुझ में सामना चाहिए
आपके....................................................

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6 टिप्‍पणियां:

"अर्श" ने कहा…

जाम-ऐ-उल्फत पीते -२ पी गए आब-ऐ-हयात

वह क्या थिंकिंग है बहोत खूब भाई ये लाइन ,शब्दों का अच्छा मिश्रण दिया आपने बहोत खूब लगी ये कविता आपकी.... ढेरो बधाई कुबूल फरमाएं.....
नई ग़ज़ल पे आपका स्नेह जरुर चाहूँगा....

अर्श

समयचक्र - महेद्र मिश्रा ने कहा…

आपके नज़दीक आने का बहाना चाहिए
जिसमें बुन लूँ आपको वो ताना बाना चाहिए

bindas rachana . bahut khoob manabhavan . dhanyawad.

विनय ने कहा…

post section से italic behaviour हटा लीजिए, कविता पढ़ते अटपटा लगता है... बहुत अच्छी कविता है

---यदि समय हो तो पधारें---
चाँद, बादल और शाम पर आपका स्वागत है|

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

वाह बंधुवर... वाह.... बधाई स्वीकारें...

दिगम्बर नासवा ने कहा…

दोस्त जिसमें तुम ही तुम हो और तुम्हारी बात हो
और तुमको ही सुनाऊं वो तराना चाहिये

गीत की तरह गुनगुनाने लायक है, बहुत सुंदर गीत है

bhoothnath(नहीं भाई राजीव थेपडा) ने कहा…

bas theek-thaak hai....!!