उपरोक्त शीर्षक चित्र श्री श्री राधा श्याम सुंदर , इस्कान मंदिर वृन्दावन, तिथि 15.04.2010 के दर्शन (vrindavan darshan से साभार ).

शनिवार, 10 जनवरी 2009

औपचारिक ही सही................

औपचारिक ही सही, कुछ तो है बात मगर
मेरा हर साल जनम दिन पे बधाई देना

हाले दिल पूछ कर उनका यूँहीं बस चल देना
जैसे रोते हुए बच्चे को मिठाई देना

जो "तुम्हारे लिए" था तुमको थमा कर तोहफा
दिल को बस चीर गया तुमको विदाई देना

मेरी सबसे बड़ी दौलत हैं मेरे गीत ग़ज़ल
मेरे मरने पे उन्हें सारी कमाई देना

दिल की आवाज़ को वो फिर भी पहचानेंगे
होगा जब बंद उन्हें सुनना दिखाई देना

उनकी चाहत है लगें पंख मेरे गीतों को
मुझको हर दर्द हरेक पीर पराई देना

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5 टिप्‍पणियां:

"अर्श" ने कहा…

स्वप्न जी बहोत ही संजीदा लिखा है आपने ये ग़ज़ल तो वाह बहोत खूब....ढेरो बधाई आपको साहब ...

महेंद्र मिश्रा ने कहा…

योगेश जी
बहुत उम्दा रचना . लिखते रहिये . शुभकामनाओ के साथ.
महेंद्र मिश्रा
जबलपुर.

safat alam ने कहा…

बहुत ही अच्छे और मधूर लेख प्रस्तुत करते हैं आप, दिल की गहराई से बहुत बहुत धन्यवाद। खूब लिखें और लिखते रहें, हमारी शुभकामनायें आपके साथ हैं, और हम ईश्वर से आपकी सफलता के लिए प्रार्थना करते है।

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत उम्दा एवं बेहतरीन. बधाई एवं शुभकामनाऐं.

दिगम्बर नासवा ने कहा…

दिल की आवाज़ को वो फिर भी पहचानेंगे
होगा जब बंद उन्हें सुनना दिखाई देना

उम्दा लिखा है, ये शेर तो ख़ास है मज़ा आ गया