मुझे है जान से प्यारा , मेरा भारत,मेरा भारत,
है जग की आँख का तारा ,मेरा भारत, मेरा भारत
शहीदों ने बहाकर खूं, जिसे दिलवाई आजादी
भगत सिंह ,राज और सुखदेव ने की ,मौत से शादी
वही है राम का, गोविन्द का, भारत ,मेरा भारत
मुझे है.........................................................
हिमालय है मुकुट जिसका, चरण धोता रहा सागर
विवेकानंद ने जिसके, जगाया दुनिया को जाकर
वही गंगा का, यमुना का , मेरा भारत, मेरा भारत
मुझे है.........................................................
जहाँ गौतम ने, नानक ने, बहाई प्रेम की धारा
किशन का जन्म होता है, जहाँ पर तोड़ कर कारा
वही मीरा का तुलसी का , मेरा भारत, मेरा भारत
मुझे है.........................................................
इसे सोने की चिडिया दोस्तों, मिलकर बनायें हम
मिटायें पाप भ्रष्टाचार , लोगों के मिटायें गम
जो है, बापू का, नेहरू का, "स्वप्न" भारत, मेरा भारत
मुझे है..............................................................
सदा संसार को देता रहा, जो ज्ञान सदियों से
जिसे है देवताओं का अमर, वरदान सदियों से
मिटा है ना मिटेगा, है, गुरुद्वारा, मेरा भारत
मुझे है..............................................................
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सात आठ वर्ष पहले की यह रचना बेटे को स्कूल में सुनाने के लिए लिख कर दी थी।
बेटा अब भारतीय नौसेना में है और २००९ की २६ जनवरी की परेड में हिस्सा ले रहा है।
२६ जनवरी के उपलक्ष्य में यह आप सब को समर्पित है। बेटे को आशीर्वाद दें। धन्यवाद
उपरोक्त शीर्षक चित्र श्री श्री राधा श्याम सुंदर , इस्कान मंदिर वृन्दावन, तिथि 15.04.2010 के दर्शन (vrindavan darshan से साभार ).
शनिवार, 17 जनवरी 2009
हमको मनमोहन से ...(एक भजन)
हमको मनमोहन से मिलवाय दो , किशोरी राधे प्यारी
हमको मनमोहन से मिलवाय दो , किशोरी राधे प्यारी
किशोरी राधे प्यारी , प्यारी बरसाने वारी
एक बार दरस तो करवाय दो , किशोरी राधे प्यारी
हमको मन मोहन से..............................................
सुनते हैं पहचान तुम्हारी ,मनमोहन से है जन्मों की
कृपा करो हम पर भी अब तो , जला दो गठरी सब कर्मों की
पहचान हमारी करवाय दो, किशोरी राधे प्यारी
किशोरी राधे प्यारी, प्यारी बरसाने वारी
हमको मन मोहन.....................................................
एक इशारा काफ़ी है बस, तेरा ओ मोहन की प्यारी
दया दृष्टि हम पर भी कर दो, कृष्ण -प्रिया वृषभान-दुलारी
मोहन से नयना मिलवाय दो , किशोरी राधे प्यारी
किशोरी राधे प्यारी,प्यारी बरसाने वारी
हमको मनमोहन से.................................................
हम भी सीखें प्रीत की भाषा, पूरी हो जन्मों की आशा
इच्छाएं मिट गई हैं सारी , श्याम मिलन की बस अभिलाषा
वंशी की धुन तो सुनवाय दो , किशोरी राधे प्यारी
किशोरी राधे प्यारी, प्यारी बरसाने वारी
हमको मनमोहन से...............................................
.......................................
हमको मनमोहन से मिलवाय दो , किशोरी राधे प्यारी
किशोरी राधे प्यारी , प्यारी बरसाने वारी
एक बार दरस तो करवाय दो , किशोरी राधे प्यारी
हमको मन मोहन से..............................................
सुनते हैं पहचान तुम्हारी ,मनमोहन से है जन्मों की
कृपा करो हम पर भी अब तो , जला दो गठरी सब कर्मों की
पहचान हमारी करवाय दो, किशोरी राधे प्यारी
किशोरी राधे प्यारी, प्यारी बरसाने वारी
हमको मन मोहन.....................................................
एक इशारा काफ़ी है बस, तेरा ओ मोहन की प्यारी
दया दृष्टि हम पर भी कर दो, कृष्ण -प्रिया वृषभान-दुलारी
मोहन से नयना मिलवाय दो , किशोरी राधे प्यारी
किशोरी राधे प्यारी,प्यारी बरसाने वारी
हमको मनमोहन से.................................................
हम भी सीखें प्रीत की भाषा, पूरी हो जन्मों की आशा
इच्छाएं मिट गई हैं सारी , श्याम मिलन की बस अभिलाषा
वंशी की धुन तो सुनवाय दो , किशोरी राधे प्यारी
किशोरी राधे प्यारी, प्यारी बरसाने वारी
हमको मनमोहन से...............................................
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लेबल:
भजन
बुधवार, 14 जनवरी 2009
मैंने जितना.....................
मैंने जितना तुम्हें मनाया है
उतने तुम रूठ -रूठ गए
फ़िर भी हर बार मैंने कोशिश की
दिल के सब स्वप्न टूट-टूट गए
तुम ना आए, ना तुम को आना था
वादा करके क्यूँ झूठ -मूठ गए
एक दिल का गुरूर था हमको
वो भी तुम लूट-लूट गए
इश्क का एक रिश्ता कायम है
बाकी नाते तो टूट-फूट गए
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उतने तुम रूठ -रूठ गए
फ़िर भी हर बार मैंने कोशिश की
दिल के सब स्वप्न टूट-टूट गए
तुम ना आए, ना तुम को आना था
वादा करके क्यूँ झूठ -मूठ गए
एक दिल का गुरूर था हमको
वो भी तुम लूट-लूट गए
इश्क का एक रिश्ता कायम है
बाकी नाते तो टूट-फूट गए
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रविवार, 11 जनवरी 2009
मुझसे मिलकर ही....................
मुझसे मिलकर ही मिटेंगी आपकी सब उलझनें
सब गिले-शिकवे मिटाने आइये आ जाइए
हैं खफा हमसे अगर तो क्यूँ खफा हैं बोलिए
दिलकी सब हमको सुनाने आइये आ जाइए
मुझसे...............................................
दिल की बस्ती के उजड़ जाने का है हमको मलाल
दिल से उजड़ा दिल मिलाने आइये आ जाइए
मुझसे...................................................
कर दीं सब रब के हवाले हमने अपनी रंजिशें
याद जन्मों की भुनाने आइये आ जाइए
मुझसे........................................................
आओ अब मिलकर चलेंगें दूर दुनिया से कहीं
प्रीत का अमृत पिलाने आइये आ जाइए
मुझसे...........................................................
बाद-ऐ-मुद्दत गले मिलकर आओ अब रोएँ रुलाएं
"स्वप्न" के टुकड़े सजाने आइये आ जाइए
मुझसे........................................................
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सब गिले-शिकवे मिटाने आइये आ जाइए
हैं खफा हमसे अगर तो क्यूँ खफा हैं बोलिए
दिलकी सब हमको सुनाने आइये आ जाइए
मुझसे...............................................
दिल की बस्ती के उजड़ जाने का है हमको मलाल
दिल से उजड़ा दिल मिलाने आइये आ जाइए
मुझसे...................................................
कर दीं सब रब के हवाले हमने अपनी रंजिशें
याद जन्मों की भुनाने आइये आ जाइए
मुझसे........................................................
आओ अब मिलकर चलेंगें दूर दुनिया से कहीं
प्रीत का अमृत पिलाने आइये आ जाइए
मुझसे...........................................................
बाद-ऐ-मुद्दत गले मिलकर आओ अब रोएँ रुलाएं
"स्वप्न" के टुकड़े सजाने आइये आ जाइए
मुझसे........................................................
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शनिवार, 10 जनवरी 2009
औपचारिक ही सही................
औपचारिक ही सही, कुछ तो है बात मगर
मेरा हर साल जनम दिन पे बधाई देना
हाले दिल पूछ कर उनका यूँहीं बस चल देना
जैसे रोते हुए बच्चे को मिठाई देना
जो "तुम्हारे लिए" था तुमको थमा कर तोहफा
दिल को बस चीर गया तुमको विदाई देना
मेरी सबसे बड़ी दौलत हैं मेरे गीत ग़ज़ल
मेरे मरने पे उन्हें सारी कमाई देना
दिल की आवाज़ को वो फिर भी पहचानेंगे
होगा जब बंद उन्हें सुनना दिखाई देना
उनकी चाहत है लगें पंख मेरे गीतों को
मुझको हर दर्द हरेक पीर पराई देना
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मेरा हर साल जनम दिन पे बधाई देना
हाले दिल पूछ कर उनका यूँहीं बस चल देना
जैसे रोते हुए बच्चे को मिठाई देना
जो "तुम्हारे लिए" था तुमको थमा कर तोहफा
दिल को बस चीर गया तुमको विदाई देना
मेरी सबसे बड़ी दौलत हैं मेरे गीत ग़ज़ल
मेरे मरने पे उन्हें सारी कमाई देना
दिल की आवाज़ को वो फिर भी पहचानेंगे
होगा जब बंद उन्हें सुनना दिखाई देना
उनकी चाहत है लगें पंख मेरे गीतों को
मुझको हर दर्द हरेक पीर पराई देना
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गुरुवार, 8 जनवरी 2009
मेरी प्रीत का झरना....................
मेरी प्रीत का झरना , बहता रहा सदा
ना जाने क्यूँ , तुमने गागर भरी नहीं
पत्थर पत्थर सर को पटका, जंगल जंगल भूला भटका
तुम अपनी निष्ठुरता देखो, नज़र इधर तक करी नहीं
मेरी प्रीत का........................................................
बीत चुके हैं साल सैकडों, बीत जायेंगे साल हज़ार
अपनी गागर में भर लो बस ,हर दम होगी यही पुकार
जन्म जन्म के बाद मिलोगे, तब भी यही कहूँगा मैं
खोज रहा हूँ अब भी तुमको , मेरी निष्ठां मरी नहीं
मेरी प्रीत का.........................................................
खारा नहीं कहीं से हूँ मैं ,बूँद बूँद बेशक चख लो
झूम उठोगे अजब नशे में, एक बार दिल में रख लो
हाँ , अमृत की बूँद न सही , गंगा जल सा पावन हूँ
स्वांति की एक बूँद सही पर, सावन की हूँ झरी नहीं
मेरी प्रीत का............................................................
बुधवार, 7 जनवरी 2009
मुझको अपने...................
मुझको अपने सपनों में ,आने की इजाज़त दे दो ना
घड़ी दो घड़ी बात करूँ , इतनी तो मोहलत दे दो ना
मुझको............................................................
तेरी यादों के चंगुल से , कुछ देर निकल बहार आऊँ
दूर करूँ कुछ शिकवे गिले, इतनी तो फुर्सत दे दो ना
मुझको............................................................
कब से पड़ा हुआ दोज़ख में , तेरे लिए दिल की मलिका
तेरे दिल में जगह मिले, इतनी तो जन्नत दे दो ना
मुझको...........................................................
मैंने तुझसे प्यार किया है , दिल जाने या रब जाने
तुझसे भी ये कह पाऊँ , बस इतनी हिम्मत दे दो ना
मुझको................................................................
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मंगलवार, 6 जनवरी 2009
बेरुखी अच्छी नहीं...........
बेरुखी अच्छी नहीं होती सदा मेरे हुज़ूर
क्यूँ चुराते हो निगाहें , छोड़ दो सारा गुरूर
दिल से दिल की बात कर लो , प्यार दो और प्यार लो
छोड़ कर सारे गिले , भूल कर सारे kusoor
जिंदगी है चार दिन की , फिर मिलें या न मिलें
ढल न जाए उम्र सारी , ढल न जाए ये सुरूर
दिल तड़प के दे रहा है ये सदा , आ जाओ ना
दिल का शीशा कर ना देना बेदिली से चूर चूर-२
दूर जाते हो तो जाओ, है मगर दावा मेरा
तुम को हंस कर मेरी बाँहों में ,समाना है ज़रूर।
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क्यूँ चुराते हो निगाहें , छोड़ दो सारा गुरूर
दिल से दिल की बात कर लो , प्यार दो और प्यार लो
छोड़ कर सारे गिले , भूल कर सारे kusoor
जिंदगी है चार दिन की , फिर मिलें या न मिलें
ढल न जाए उम्र सारी , ढल न जाए ये सुरूर
दिल तड़प के दे रहा है ये सदा , आ जाओ ना
दिल का शीशा कर ना देना बेदिली से चूर चूर-२
दूर जाते हो तो जाओ, है मगर दावा मेरा
तुम को हंस कर मेरी बाँहों में ,समाना है ज़रूर।
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सोमवार, 5 जनवरी 2009
आपके नज़दीक आने का......................
आपके नज़दीक आने का बहाना चाहिए
जिसमें बुन लूँ आपको वो ताना बाना चाहिए
दोस्त जिसमें तुम ही तुम हो और तुम्हारी बात हो
और तुमको ही सुनाऊं वो तराना चाहिये
आपके.............................................
कैसी जिद है आपकी कुछ सोच कर तो बोलिए
इश्क-ऐ-हकीकी या मिजाजी है अजी कुछ खोलिए
सामने मैं हूँ मगर तुमको दीवाना चाहिए
आपके .........................................................
जाम-ऐ-उल्फत पीते -२ पी गए आब-ऐ-हयात
मैं समाऊँ आप में करते हो क्यूँ छोटी सी बात
अब तो प्रियवर आपको मुझ में सामना चाहिए
आपके....................................................
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जिसमें बुन लूँ आपको वो ताना बाना चाहिए
दोस्त जिसमें तुम ही तुम हो और तुम्हारी बात हो
और तुमको ही सुनाऊं वो तराना चाहिये
आपके.............................................
कैसी जिद है आपकी कुछ सोच कर तो बोलिए
इश्क-ऐ-हकीकी या मिजाजी है अजी कुछ खोलिए
सामने मैं हूँ मगर तुमको दीवाना चाहिए
आपके .........................................................
जाम-ऐ-उल्फत पीते -२ पी गए आब-ऐ-हयात
मैं समाऊँ आप में करते हो क्यूँ छोटी सी बात
अब तो प्रियवर आपको मुझ में सामना चाहिए
आपके....................................................
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शनिवार, 3 जनवरी 2009
"मैं"
मैं
तो , सिर्फ़ खामोशी हूँ
शून्य से चलकर
शून्य की ओंर
बढती खामोशी
प्रकाश से चलकर
प्रकाश की ओर
बढती खामोशी
मन, बुध्धि ,
इन्द्रियों से परे
हवा के साथ -२
बहती खामोशी
अनंत के गहनतम
स्थल में छिपी खामोशी
प्रेमी के ह्रदय में छिपी
तड़पती खामोशी
ब्रह्म रंध्र से निकल
ब्रह्माण्ड के कण कण में व्याप्त
खामोशी
कहीं परमाणु में सिमटी
और कहीं
विराट से विराट तर
होती खामोशी
यानि
"मैं"
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तो , सिर्फ़ खामोशी हूँ
शून्य से चलकर
शून्य की ओंर
बढती खामोशी
प्रकाश से चलकर
प्रकाश की ओर
बढती खामोशी
मन, बुध्धि ,
इन्द्रियों से परे
हवा के साथ -२
बहती खामोशी
अनंत के गहनतम
स्थल में छिपी खामोशी
प्रेमी के ह्रदय में छिपी
तड़पती खामोशी
ब्रह्म रंध्र से निकल
ब्रह्माण्ड के कण कण में व्याप्त
खामोशी
कहीं परमाणु में सिमटी
और कहीं
विराट से विराट तर
होती खामोशी
यानि
"मैं"
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