उपरोक्त शीर्षक चित्र श्री श्री राधा श्याम सुंदर , इस्कान मंदिर वृन्दावन, तिथि 15.04.2010 के दर्शन (vrindavan darshan से साभार ).
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बुधवार, 13 जुलाई 2011

सहज मिलेंगे श्याम प्यार करके तो देखो

सहज मिलेंगे श्याम प्यार करके तो देखो

सहज मिलेंगे श्याम प्यार करके तो देखो
उसकी खातिर कभी आँख भर के तो देखो

सिर्फ प्यार का भूखा है  मेरा ठाकुर
मेरी बात पर ऐतबार करके तो देखो

आएगा , आता है," वो" सबका प्रेमी
मन -मंदिर अपना बुहार करके तो देखो

न्यौछावर कर दो, उस पर, सब कुछ अपना
सोचो मत बस एक बार करके तो देखो

छिपा हुआ है वही तुम्हारे तन मन में
नयन मूँद उसको निहार करके तो देखो

कभी तो रोओ तड़पो उसको पाने को
मेरी बातों पर विचार करके तो देखो

"स्वप्न" मिल गई है बहार, उसको पाकर
जीवन अपना भी, बहार करके तो देखो  

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रविवार, 11 जुलाई 2010

मुझे ले चलो

मुझे ले चलो

मुझे ले चलो राधा के पास
मेरा कहीं लागे ना जिया
बिन राधा के मैं हूँ उदास
मेरा कहीं लागे ना जिया

राधा से बिछुड़े बीते हैं साल कईईई.....
पल पल होती जाती उसकी याद नई
याद आता  है मधुबन का रास
मेरा कहीं...............................

राधा से कुछ मन की बातें करनी है
पनघट पर राधा कि गागर भरनी है
राधा राधा बोले हर साँस
मेरा कहीं..................................

रूठी राधा को मैं आज मनाऊंगा
गले लगा कर उसको धीर बंधाऊंगा
उससे प्रीत करूँगा कुछ खास
मेरा कहीं..........................



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भजन 

बुधवार, 16 जून 2010

अब तो बस दे दे दरस, ओ सांवरे

अब तो बस दे दे दरस, ओ सांवरे

अब तो बस दे दे दरस, ओ सांवरे
जग की ज्वाला में जला मन, ढूंढे तेरी छाँव रे
अब तो बस............................................

एक तेरी प्यास तेरी आस, हर एक श्वास में
तुझको पा जाऊं तड़पता मन ,इसी विश्वास में
रिश्ते  नाते तोड़ रख दी, जिंदगी भी दांव रे
अब तो बस..............................................

न राधा हूँ न मीरा हूँ , न तुलसी न संत कबीर
तेरा नाम ले भटक रहा हूँ, बना बावरा एक फकीर
अब तो बता दे है कहाँ, तेरा देश, तेरा गाँव  रे
अब तो बस............................................

जग का बंधन ना रहा, ना  देह का बंधन
सुख दुःख भूला, हर्ष शोक, भूला सब क्रंदन
बस प्रतीक्षा रत पडूंगा , कब तुम्हारे पाँव रे
अब तो बस.......................................
योगेश स्वप्न

शनिवार, 17 अप्रैल 2010

आ भी जाओ


आ भी जाओ (भजन)

जब तड़प उठ ही गई है, तुमको पाने कि ह्रदय में
दूर तुम रह ना सकोगे , श्याम मेरे आ भी जाओ

हम तुम्हारे हो चुके  , क्यूँ तुम मेरे होते नहीं
गैर तुम कह ना सकोगे , श्याम मेरे आ भी जाओ

ये मिलन कि चाह मेरी , ये विरह कि पीर मेरी
और तुम सह ना सकोगे, श्याम मेरे आ भी जाओ

बिन तुम्हारे रह रहे हैं  , बन के आंसू बह रहे हैं 
तुम मगर बह ना सकोगे, श्याम मेरे आ भी जाओ.

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बुधवार, 30 दिसंबर 2009

सारी गोपियाँ कहें मोहे, सांवरो कन्हाई

लीजिये प्रस्तुत है "श्याम श्याम  भजो" कैसेट से एक और रचना.

सारी गोपियाँ कहें मोहे,सांवरो कन्हाई

सारी गोपियाँ कहें मोहे,सांवरो कन्हाई
सारी गोपियाँ कहें मोहे, सांवरो कन्हाई
मोहे तू ही बता दे ,मैं का करूँ माई (२)
सारी गोपियाँ कहें..............................

सांवरो कह के , मोहे खिझावें
माखन चोरी,नाम लगावें
मैंने तोडी नहीं मटकी, दही ना चुराई
सारी गोपियाँ कहें.................................


सांवरो मेरा, नाम रहेगा
कृष्णा मुझको ,कौन कहेगा
बेर बेर मैया मोहे, आवे है रुलाई
सारी गोपियाँ कहें................................

और कहें तो,छोड़ भी दूं मैं
सबसे नाता ,तोड़ भी दूं मैं
सांवरो कहे मोहे , मेरो दाऊ भाई
सारी गोपियाँ कहें................................


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रविवार, 4 अक्टूबर 2009

कन्हैया को मैया बुलाय रही रे

लीजिये प्रस्तुत है "श्याम श्याम भजो" कैसेट से मेरा लिखा दूसरा भजन "कन्हैया को मैया बुलाय रही रे " इस पोस्ट के साथ इस भजन और पिछली १९.०५.२००९ की पोस्ट में प्रकाशित भजन "श्याम श्याम भजो" का ऑडियो /विडियो भी संलग्न/अटैच कर रहा हूँ. पढिये और सुनिए . और सुनकर बताइए आपको कैसे लगे दोनों भजन.

कन्हैया को मैया बुलाय रही रे
कन्हैया को मैया बुलाय रही रे
आजा तोहे माखन खिलाये देऊ रे ()

क्यूँ चोरी का माखन खाता -
गोपिन से मुझको सुनवाता -
चोर है तेरा कान्हा , क्यूँ दुनिया कहे
माखन से तुझको छकाये देऊ रे

कन्हैया को मैया बुलाय रही रे ..................

क्यूँ खोजे दूजे घर माखन-2
क्यूँ लगवाता खुद पर लांछन-2
घर में कितना भरा है रे माखन दही
माखन का पर्वत बने देऊ रे

कन्हैया को मैया..............................

जितना चाहे उतना खा ले-
माखन में मिश्री मिलवा ले -
राधा के घर तू जाता , क्यूँ रे बता
राधा को घर ही बुलाय देऊ रे

कन्हैया को मैया....................................http://www.youtube.com/watch?v=sF0qoNiDvmc

गुरुवार, 13 अगस्त 2009

अपने प्रेमी जन की सुध ले अब तो धीर बंधा जा रे (कृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष।)

कृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष

(भगवन कृष्ण के गोकुल से मथुरा गमन के बाद का शब्द चित्र ।)

तेरे बाबा करे हैं याद तुझे अब तो मोहन घर आ जा रे
दिल से आंसू की धार बहे , अब तो गले लगा जा रे

सूना -सूना लगता गोकुल
जड़ चेतन सब हैं अति व्याकुल
सुध-बुध खो तेरी मैया कहे, चंदा-सा मुख दिखला जा रे
तेरे बाबा करे हैं..........................................................

भोजन में अब स्वाद नहीं है
तुझे किसी की याद नहीं है
माखन मिश्री करें प्रतीक्षा, आकर भोग लगा जा रे
तेरे बाबा करे हैं.......................................................

तेरी सब गैया रोती हैं
शुक मयूर सब मौन हो गए
ग्वाल बाल सब चीख रहे हैं, आकर गाय चारा जा रे
तेरे बाबा करे हैं......................................................

सभी गोपियाँ तड़प रही हैं
राधा बावरी भटक रही है
अपने प्रेमी जन की सुध ले , अब तो धीर बंधा जा रे
तेरे बाबा करे हैं........................................................
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स्वतंत्रता दिवस पर एक प्रश्न

देश प्रेमी हो तो बोलो देश की खातिर क्या दोगे?
रक्त के अतिरिक्त इस पर और क्या अर्पित करोगे?

दे सको तो मानसिक संकीर्णता दे दो
धर्म की नीवें हिलाती जीर्णता दे दो

जो अहिंसा को मिटाए क्रोध दे दो
सत्य को झुठलाये ऐसा बोध दे दो

कुटिल ह्रदय के सारे तुच्छ विचार दे दो
पाप को जो मूल भ्रष्टाचार दे दो

सौगंध लो ये सब नहीं देते डरोगे
देश प्रेमी हो तो बोलो देश की खातिर क्या दोगे?

देश प्रेमी हो तो बोलो देश की खातिर क्या दोगे?
रक्त के अतिरिक्त इस पर और क्या अर्पित करोगे?

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रविवार, 14 जून 2009

मेरे श्याम..........

बहुत हो चुकी आँख मिचौनी , दूरी आज मिटाओ श्याम
मुझसे आकर मिलो यहाँ या, मुझको पास बुलाओ श्याम
मेरे श्याम, मेरे श्याम,मेरे श्याम,मेरे श्याम,मेरे श्याम

दूर -दूर रहते रहते तो दूरी बढती जाती है
तुम तो आते नहीं तुम्हारी,यादें बहुत सताती है
दिव्य नेत्र दे दो आँखों से पर्दा ज़रा हटाओ श्याम
मेरे श्याम.........................................................

दूर बज रही वंशी की धुन मुझको पास बुलाती है
कभी सुनाई देती मुझको और कभी खो जाती है
आओ मेरे निकट बैठ कर वंशी आज बजाओ श्याम
मेरे श्याम......................................................

भव सागर में भटक-२ कर देखा सब कुछ झूठा है
मोहन तेरी शरण में सुख है, सुख का सपना टूटा है
कृपा करो मुझपर भी अब तो अपनी शरण लगाओ श्याम
मेरे श्याम.....................................................

मेरी तो अभिलाषा मोहन अब तुम में मिल जाना है
थका -थका नदिया का जल हूँ, सागर आज समाना है
सागर में मिलने दो मुझको , "मैं" को आज मिटाओ श्याम
मेरे श्याम...................................................

सोमवार, 16 फ़रवरी 2009

मुझसे दूर ना जा ...................

मोहन मोहिनी मूरत मुझे, दिखाकर मुझसे दूर ना जा
मनोहारिणी मुरली मधुर , सुनाकर मुझसे दूर ना जा


तड़पता मुझको यूँ ना छोड़
मुखडा मुझसे यूँ ना मोड़
नाता मुझसे यूँ ना तोड़
हाथ रही तेरे आगे जोड़
मनभावन मधुकर मन मेरा , चुरा कर मुझसे दूर ना जा
मोहन मोहिनी मूरत मुझे..........................................

मन में मुझे बसा लो तुम
जग से मुझे छुडा लो तुम
अपने गले नहीं तो नाथ
अपनी शरण लगा लो तुम
मनमोहन मतवाली मुझे, बना कर मुझसे दूर ना जा
मोहन मोहिनी मूरत मुझे........................................

जनम जनम की दासी हूँ,
प्रेम -सुधा की प्यासी हूँ
मीरा-सी तो मान ले मोहन
बेशक ना राधा-सी हूँ
माधव मेरी मंजिल मुझे , दिखाकर मुझसे दूर ना जा
मोहन मोहिनी मूरत मुझे........................................

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शनिवार, 17 जनवरी 2009

हमको मनमोहन से ...(एक भजन)

हमको मनमोहन से मिलवाय दो , किशोरी राधे प्यारी
हमको मनमोहन से मिलवाय दो , किशोरी राधे प्यारी
किशोरी राधे प्यारी , प्यारी बरसाने वारी
एक बार दरस तो करवाय दो , किशोरी राधे प्यारी
हमको मन मोहन से..............................................

सुनते हैं पहचान तुम्हारी ,मनमोहन से है जन्मों की
कृपा करो हम पर भी अब तो , जला दो गठरी सब कर्मों की
पहचान हमारी करवाय दो, किशोरी राधे प्यारी
किशोरी राधे प्यारी, प्यारी बरसाने वारी
हमको मन मोहन.....................................................

एक इशारा काफ़ी है बस, तेरा ओ मोहन की प्यारी
दया दृष्टि हम पर भी कर दो, कृष्ण -प्रिया वृषभान-दुलारी
मोहन से नयना मिलवाय दो , किशोरी राधे प्यारी
किशोरी राधे प्यारी,प्यारी बरसाने वारी
हमको मनमोहन से.................................................

हम भी सीखें प्रीत की भाषा, पूरी हो जन्मों की आशा
इच्छाएं मिट गई हैं सारी , श्याम मिलन की बस अभिलाषा
वंशी की धुन तो सुनवाय दो , किशोरी राधे प्यारी
किशोरी राधे प्यारी, प्यारी बरसाने वारी
हमको मनमोहन से...............................................

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